नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच भारत के लिए एक बेहद राहत भरी खबर आई है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक ऐतिहासिक शांति समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य पर लगी पाबंदियों में ढील मिलनी शुरू हो गई है। इस समझौते के तहत होर्मुज से जहाजों की मुक्त आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी।इस फैसले का सीधा सकारात्मक असर भारत पर दिखने लगा है। पश्चिम एशिया संकट के कारण होर्मुज में फंसे भारत के 34 जहाजों के जल्द ही भारत पहुंचने की उम्मीद जग गई है, जिससे देश के करोड़ों उपभोक्ताओं और किसानों को भारी राहत मिलेगी।
- ‘दिशा’ टैंकर ने पार किया होर्मुज, 18 जून तक भारत पहुंचने की उम्मीद
इस समझौते का पहला बड़ा असर तब देखा गया जब तरल प्राकृतिक गैस (LNG) लेकर आ रहे भारतीय टैंकर ‘दिशा’ ने सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर लिया।
- क्या है लदा: इस टैंकर पर 62,370 टन LNG मौजूद है।
- कब तक पहुंचेगा: उम्मीद है कि यह टैंकर 18 जून तक भारत के तट पर पहुंच जाएगा।
- बाकी जहाजों की स्थिति: ‘दिशा’ के बाद अब वहां फंसे 34 अन्य भारतीय जहाजों के भी जल्द ही इस रास्ते को पार करने की उम्मीद है।
- करोड़ों किसानों के लिए क्यों जरूरी है यह खबर?
होर्मुज में फंसे 34 जहाजों में से 16 जहाज बेहद खास हैं, क्योंकि इनमें भारत के अन्नदाताओं (किसानों) के लिए फर्टिलाइजर (खाद) लदा हुआ है। इन 16 जहाजों का विवरण इस प्रकार है:
| खाद का प्रकार | जहाजों की संख्या |
| यूरिया (Urea) | 08 जहाज |
| डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) | 04 जहाज |
| सल्फर (Sulfur) | 03 जहाज |
| अमोनिया (Ammonia) | 01 जहाज |
यदि समझौते के नियम तय समय पर काम करते हैं, तो भारत के करोड़ों किसानों को खेती के लिए जरूरी खाद की किल्लत से नहीं जूझना पड़ेगा।
- भारत के लिए क्यों लाइफलाइन है ‘होर्मुज’?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में आयात पर निर्भर है:
- भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जिसका लगभग आधा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है।
- देश में आने वाली कुल LNG का 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा इसी होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरकर भारत पहुंचता है। यही वजह है कि इस रास्ते के बंद होने से भारत में तेल और गैस की आपूर्ति बुरी तरह बाधित हो गई थी।