नई दिल्ली: वेदांता समूह के ऐतिहासिक डीमर्जर के बाद निवेशकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई बनी कंपनियों में सबसे ज्यादा ग्रोथ और रिटर्न की संभावना किस शेयर में है। बाजार विशेषज्ञों और ब्रोकरेज हाउसों की राय में फिलहाल Vedanta Aluminium सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरी है।सोमवार को डीमर्जर के बाद पहली बार निवेशकों को अलग-अलग कारोबारों में ट्रेडिंग का मौका मिला। शुरुआती बाजार संकेतों से साफ हुआ कि निवेशकों का सबसे ज्यादा भरोसा एल्युमिनियम बिजनेस पर दिखाई दे रहा है। करीब 2.06 लाख करोड़ रुपये के मार्केट वैल्यूएशन के साथ Vedanta Aluminium समूह की सबसे बड़ी इकाई बन गई है।
- डीमर्जर से खुली वैल्यू
वेदांता के इस मेगा डीमर्जर को भारतीय मेटल और माइनिंग सेक्टर के सबसे बड़े कॉरपोरेट पुनर्गठनों में गिना जा रहा है। रिकॉर्ड डेट पर वेदांता के शेयर रखने वाले निवेशकों को प्रत्येक शेयर के बदले Vedanta Aluminium, Vedanta Power, Vedanta Oil & Gas और Vedanta Iron & Steel के एक-एक शेयर मिले हैं।विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से वर्षों से कंपनी के मूल्यांकन पर लगा “कांग्लोमरेट डिस्काउंट” कम होगा और करीब 20% अतिरिक्त वैल्यू अनलॉक होने की संभावना है।
- क्यों पसंद आ रही है Vedanta Aluminium?
आशिका कैपिटल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट कौस्तुभ राणे के अनुसार, Vedanta Aluminium के पास विशाल उत्पादन क्षमता, मजबूत नकदी प्रवाह, कम लागत वाली संचालन प्रणाली और लंबी अवधि की मांग का मजबूत आधार मौजूद है।कंपनी ने अपनी एल्युमिनियम उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 60 लाख टन प्रति वर्ष करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए वित्त वर्ष 2028 तक 13,226 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई गई है।
- कम लागत, ज्यादा मुनाफा
रेटिंग एजेंसी ICRA के मुताबिक कंपनी के स्मेल्टर वैश्विक स्तर पर सबसे कम लागत वाले उत्पादकों में शामिल हैं। इसका फायदा यह होगा कि कमोडिटी कीमतों में गिरावट आने पर भी कंपनी प्रतिस्पर्धियों की तुलना में बेहतर लाभ कमाने की स्थिति में रहेगी।इसके अलावा कंपनी ने एलुमिना उत्पादन क्षमता को 20 लाख टन से बढ़ाकर 50 लाख टन प्रति वर्ष कर दिया है, जिससे कच्चे माल की लागत घटेगी और मार्जिन बेहतर हो सकते हैं।
- EV और ग्रीन एनर्जी से मिलेगा बड़ा सपोर्ट
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन (EV), रिन्यूएबल एनर्जी, ट्रांसमिशन नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में बढ़ती मांग आने वाले वर्षों में एल्युमिनियम की खपत को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है।ICICI Securities ने Vedanta Aluminium को समूह का “क्राउन ज्वेल” बताया है, जबकि Khandwala Securities का कहना है कि कंपनी भारत की सबसे कम लागत वाली इंटीग्रेटेड एल्युमिनियम निर्माता है।
- Vedanta Power में भी अवसर
हालांकि बाजार की पहली पसंद Vedanta Aluminium बनी हुई है, लेकिन Vedanta Power को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कंपनी के पास 4 गीगावॉट से अधिक बिजली उत्पादन क्षमता है और वह 2033 तक इसे बढ़ाकर 12 गीगावॉट करने की योजना पर काम कर रही है।फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि बिजली दरों, कोयले की उपलब्धता और नीतिगत जोखिमों के कारण पावर बिजनेस में अनिश्चितता अपेक्षाकृत अधिक है।
- निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
डीमर्जर के बाद अब सभी कंपनियां स्वतंत्र रूप से बाजार में अपनी पहचान बनाएंगी। विशेषज्ञों की राय में यदि स्केल, ग्रोथ, लागत लाभ और भविष्य की मांग को आधार बनाया जाए तो Vedanta Aluminium फिलहाल सबसे आकर्षक निवेश अवसर के रूप में सामने आ रही है। वहीं, लंबे समय की दृष्टि रखने वाले निवेशकों के लिए Vedanta Power, Oil & Gas और Iron & Steel कारोबार भी अलग-अलग संभावनाएं पेश कर सकते हैं।