कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में झाड़फूंक और इलाज के बहाने 14 वर्षीय नाबालिग के कथित यौन शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, बच्ची की तबीयत खराब होने पर परिजन उसे एक कथित वैद्य के पास लेकर गए थे। बाद में अस्पताल में जांच के दौरान बच्ची के करीब पांच महीने की गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।
इलाज के बहाने वैद्य के पास ले गए थे परिजन
पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, 15 अप्रैल 2026 को नाबालिग की तबीयत खराब होने पर उसके परिजन उसे कांकेर जिले के आमागांव निवासी रमेश कुमार पिस्दा (44) के पास इलाज के लिए ले गए थे। आरोपी खुद को वैद्य बताता था। आरोप है कि बच्ची की जांच करने के बहाने उसने परिजनों को बच्चेदानी में समस्या होने की बात कही और बच्ची को एक ताबीज दिया।
बताया गया कि 25 मई को बच्ची के पिता ने काम के सिलसिले में उसे अपने छोटे भाई यानी बच्ची के चाचा के साथ दोबारा वैद्य के पास भेजा। शिकायत के अनुसार, वहां आरोपी बच्ची को पूजा घर में ले गया और उसके चाचा को दूसरी जगह भेज दिया। आरोप है कि इसके बाद बच्ची के साथ गलत हरकत की गई।
अस्पताल में जांच के बाद सामने आया मामला
परिजनों के अनुसार, बच्ची को समय-समय पर आरोपी के पास ले जाया जाता रहा। आरोप है कि इस दौरान उसे परिवार के सदस्यों से अलग रखा जाता था। 17 अक्टूबर को जब बच्ची की तबीयत फिर बिगड़ी, तो परिजन उसे अंतागढ़ अस्पताल लेकर पहुंचे।
अस्पताल में चिकित्सकीय जांच के दौरान बच्ची के करीब पांच महीने की गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। यह पता चलने के बाद परिजनों ने बच्ची से बातचीत की। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, नाबालिग ने आरोप लगाया कि वैद्य उसे नशीली दवा देकर बेहोश कर देता था और इसी दौरान उसके साथ यौन शोषण करता था।
ताड़ोकी थाने में मामला दर्ज, आरोपी गिरफ्तार
घटना की जानकारी मिलने के बाद नाबालिग के पिता ने 18 अक्टूबर 2026 को ताड़ोकी थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी रमेश कुमार पिस्दा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(1), 64(2)(m), 65(1) और पॉक्सो एक्ट की धारा 4 व 6 के तहत अपराध दर्ज किया।
पुलिस ने आरोपी को 19 अक्टूबर को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। मामले की जांच जारी है। पुलिस आरोपों से जुड़े तथ्यों और घटनाक्रम की जांच कर रही है। नाबालिग की पहचान और निजता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उससे जुड़ी पहचान संबंधी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए।
यह मामला एक नाबालिग की सुरक्षा और कथित रूप से इलाज के नाम पर किए गए अपराध को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है। मामले में आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
