रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि): छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले की धान खरीदी समितियों में बड़े पैमाने पर धान शॉर्टेज (वजन में कमी) का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान के उठाव के बाद जब समितियों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराया गया, तब 12 समितियों के स्टॉक से कुल 6,590 क्विंटल धान गायब पाया गया।
लापता हुए इस धान की कुल सरकारी कीमत लगभग 2 करोड़ 17 लाख 47 हजार रुपये आंकी गई है। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है और प्रशासन ने सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
- इन केंद्रों में मिला सबसे बड़ा ‘शॉर्टेज’ (धान की कमी)
- विशेष जांच टीम के भौतिक सत्यापन के दौरान अलग-अलग उपार्जन केंद्रों में सरकारी रिकॉर्ड और जमीन पर मौजूद वास्तविक स्टॉक के बीच भारी अंतर देखने को मिला:
- रीवा केंद्र (आरंग शाखा): यहाँ सबसे ज्यादा 855 क्विंटल से अधिक धान शॉर्टेज मिला।
- फरफोद केंद्र (खोरपा शाखा): रिकॉर्ड की तुलना में 734 क्विंटल धान कम पाया गया।
- टिकारी केंद्र (खोरपा शाखा): यहाँ भी 732 क्विंटल धान गायब मिला।
- अन्य केंद्र: मंदिर हसौद के टेकारी केंद्र तथा तिल्दा क्षेत्र के देवरी और लौहड़ा केंद्रों में भी 500 क्विंटल से अधिक धान कम होने की आधिकारिक पुष्टि हुई है।
- चार विभागों की ‘विशेष कमेटी’ ने खोला राज
- खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सख्त निर्देश पर जिले में एक हाई-लेवल विशेष जांच कमेटी का गठन किया गया था। इस संयुक्त टीम में खाद्य, राजस्व, मंडी और सहकारिता विभाग के निरीक्षकों को शामिल किया गया था।
- जांच टीम ने जब अचानक उपार्जन केंद्रों का दौरा कर वहां भंडारित धान के बोरों की गिनती की, तब कागजों और हकीकत का यह बड़ा अंतर पकड़ा गया। प्रशासन ने शुरुआती कार्रवाई करते हुए सभी संबंधित समितियों को ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी कर जवाब मांगा है।
- दूसरा पक्ष: समिति संघ ने एफआईआर (FIR) को बताया गलत, राइस मिलर्स पर मढ़ा दोष
- एक तरफ जहाँ प्रशासन इसे आपराधिक लापरवाही और घोटाला मानकर एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में है, वहीं दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ धान खरीदी समिति संघ इसके विरोध में उतर आया है।
- संघ के प्रांतीय अध्यक्ष नरेंद्र कुमार साहू ने समिति प्रबंधकों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई को पूरी तरह अनुचित बताया है। उन्होंने इसके पीछे का गणित समझाते हुए कहा:
फिलहाल प्रशासन समिति संघ के दावों को दरकिनार कर सभी 12 मामलों की अलग-अलग और गहनता से जांच कर रहा है। यदि समितियां धान की कमी का वैध कारण और सुखात का सही ब्योरा नहीं दे पाती हैं, तो प्रबंधकों पर पैसों की रिकवरी के साथ-साथ जेल जाने की नौबत भी आ सकती है।