मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,247.71 अंक यानी 1.67 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,580.54 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 383.70 अंक यानी 1.64 प्रतिशत फिसलकर 23,063.10 अंक पर पहुंच गया। बाजार में यह गिरावट व्यापक रही और बैंकिंग, वित्तीय तथा बीमा कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला।
गुरुवार को सेंसेक्स 74,272.40 अंक पर खुला था, जबकि निफ्टी ने 23,221.80 अंक से कारोबार की शुरुआत की। दिनभर बिकवाली का दबाव बढ़ता गया और कारोबार खत्म होने तक दोनों प्रमुख सूचकांक बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। रिपोर्टों के मुताबिक, 30 शेयरों वाले सेंसेक्स में 29 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।
बीमा क्षेत्र में बदलाव के प्रस्ताव से वित्तीय शेयरों पर दबाव
गुरुवार की गिरावट के प्रमुख घरेलू कारणों में बीमा क्षेत्र को लेकर नियामकीय बदलाव का प्रस्ताव भी रहा। भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण यानी IRDAI ने बीमा वितरण व्यवस्था और कमीशन से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए परामर्श पत्र जारी किया है। इसमें बीमा कंपनियों के खर्च और वितरकों को दिए जाने वाले भुगतान को लेकर कई प्रस्ताव रखे गए हैं।
इन प्रस्तावों के सामने आने के बाद बीमा और वित्तीय सेवा कंपनियों के शेयरों में बिकवाली तेज हो गई। डिजिटल इंश्योरेंस प्लेटफॉर्म और बीमा कारोबार से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। इससे बाजार में निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई।
बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में जोरदार बिकवाली
बाजार की गिरावट में बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों की बड़ी भूमिका रही। बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक और बजाज फिनसर्व समेत कई प्रमुख शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, बजाज फाइनेंस करीब 5.47 प्रतिशत और एक्सिस बैंक 4.67 प्रतिशत नीचे बंद हुआ, जबकि बजाज फिनसर्व में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट रही।
वित्तीय कंपनियों में बिकवाली का असर प्रमुख सूचकांकों पर भी पड़ा। बाजार में बड़ी कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली।
कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के पार
भारतीय शेयर बाजार पर दूसरा बड़ा दबाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का रहा। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर चला गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार को ब्रेंट क्रूड करीब 105.4 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में लंबे समय तक तेल की कीमत ऊंची रहने पर देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से कच्चे तेल की तेजी को भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण जोखिम के तौर पर देखा जा रहा है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी भी बनी वजह
वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी से निवेशकों के बीच चिंता बढ़ी। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में तेज बढ़ोतरी हुई, जिससे वैश्विक स्तर पर जोखिम वाली परिसंपत्तियों पर दबाव देखा गया।
बॉन्ड यील्ड बढ़ने से वैश्विक निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियों का आकर्षण बढ़ सकता है। इसका असर उभरते बाजारों में पूंजी के प्रवाह और शेयर बाजार की धारणा पर पड़ सकता है।
ईरान-अमेरिका तनाव से भी बढ़ी चिंता
मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव भी बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का असर कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों पर पड़ने की आशंका बनी हुई है। तेल की कीमतों में लगातार तेजी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आयात लागत और महंगाई के मोर्चे पर चुनौती बढ़ा सकती है।
बाजार में चौतरफा बिकवाली
गुरुवार को गिरावट केवल सेंसेक्स और निफ्टी तक सीमित नहीं रही। व्यापक बाजार में भी बिकवाली देखने को मिली। प्रमुख सेक्टरों में वित्तीय और बैंकिंग शेयरों के साथ कई अन्य क्षेत्रों में भी कमजोरी रही। रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख 16 सेक्टोरल इंडेक्स में से 14 गिरावट के साथ बंद हुए।
इस तरह घरेलू स्तर पर बीमा क्षेत्र में प्रस्तावित बदलाव और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की तेजी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक तनाव ने मिलकर निवेशकों की धारणा पर दबाव बनाया। गुरुवार के कारोबार में इसी वजह से शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
