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मोहन यादव कैबिनेट में फेरबदल की अटकलें तेज, पशुपालन मंत्री लखन पटेल से वापस लिया गया विभाग

भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाओं के बीच राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल से पशुपालन एवं डेयरी विभाग वापस लिए जाने के फैसले ने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। सरकार के इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के पुनर्वितरण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस फैसले के पीछे किसी विशेष कारण की आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।सूत्रों के अनुसार, देर रात इस संबंध में निर्णय लिया गया और उसके तुरंत बाद गजट अधिसूचना जारी कर दी गई। विभाग वापस लिए जाने के बाद अब पशुपालन एवं डेयरी विभाग की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने पास रखी है।

‘यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है’— लखन पटेल

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए लखन पटेल ने संक्षिप्त बयान में कहा कि विभागों का आवंटन और उनमें बदलाव मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। उन्होंने कहा, “यह मुख्यमंत्री का अधिकार है कि वह किसी भी समय विभागों में परिवर्तन करें।” इसके बाद उन्होंने इस विषय पर अधिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

मंत्रियों की समीक्षा के बाद बढ़ीं अटकलें

इस फैसले को भारतीय जनता पार्टी की ओर से हाल ही में की गई मंत्रियों की समीक्षा प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कुछ दिन पहले बताया था कि मुख्यमंत्री और संगठन ने सभी मंत्रियों के कार्य, राजनीतिक प्रभाव और विभागीय प्रदर्शन की समीक्षा की है। यह रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को भी भेजी जा चुकी है।हेमंत खंडेलवाल ने कहा था कि प्रत्येक मंत्री से व्यक्तिगत रूप से चर्चा की गई और उनके कामकाज के साथ-साथ संगठनात्मक गतिविधियों का भी मूल्यांकन किया गया। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि भविष्य में यदि आवश्यकता हुई तो संगठन और केंद्रीय नेतृत्व उचित निर्णय ले सकते हैं।

क्या फेरबदल की शुरुआत है?

लखन पटेल से विभाग वापस लिए जाने के बाद अब राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की पहली कड़ी है। हालांकि, सरकार या भाजपा की ओर से अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस फैसले का मंत्रिमंडल विस्तार या पुनर्गठन से कोई सीधा संबंध है।फिलहाल इसे प्रशासनिक निर्णय माना जा रहा है, लेकिन इसकी टाइमिंग ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। माना जा रहा है कि समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर आने वाले समय में कुछ अन्य मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

महत्वपूर्ण माना जाता है पशुपालन विभाग

पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्य सरकार के लिए अहम विभागों में शामिल है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, डेयरी सहकारी समितियों के विस्तार, गौ-संरक्षण और निराश्रित मवेशियों से जुड़ी योजनाओं का संचालन इसी विभाग के माध्यम से किया जाता है।राज्य सरकार मध्य प्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल करने की दिशा में काम कर रही है। इसके अलावा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के सहयोग से दूध उत्पादन बढ़ाने और डेयरी नेटवर्क का विस्तार करने की योजनाएं भी चल रही हैं।

निराश्रित मवेशियों का मुद्दा बना चुनौती

लखन पटेल ने विधानसभा में दावा किया था कि अगले दो वर्षों में प्रदेश की सड़कों को निराश्रित मवेशियों से मुक्त कर दिया जाएगा। उन्होंने स्वावलंबी गौशालाओं के निर्माण, प्रति गौवंश सहायता राशि बढ़ाने और बड़े गौ-आवास विकसित करने की योजनाओं की भी जानकारी दी थी।
हालांकि, प्रदेश में आवारा मवेशियों से होने वाली सड़क दुर्घटनाएं और किसानों की फसलों को नुकसान जैसे मुद्दे लगातार सरकार के सामने चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में इस महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री के पास आना राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सरकार की चुप्पी, फैसले पर बनी नजर

फिलहाल राज्य सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि विभाग वापस लेने का निर्णय प्रशासनिक पुनर्व्यवस्था का हिस्सा है, विभागीय कामकाज को लेकर असंतोष का परिणाम है या फिर संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल की तैयारी। ऐसे में आने वाले दिनों में यदि सरकार या भाजपा नेतृत्व की ओर से कोई बड़ा फैसला लिया जाता है, तो यह मध्य प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम साबित हो सकता है।

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