नई दिल्ली। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधारों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गठित के. राधाकृष्णन समिति की कई महत्वपूर्ण सिफारिशें अब तक लागू नहीं की गई हैं।जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के माध्यम से दावा किया कि NTA की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए गठित उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति ने कुल 101 सिफारिशें दी थीं, जिनमें से 27 सिफारिशें अभी भी लंबित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने परीक्षा सुधारों को लेकर देश के सामने पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं की और कई जरूरी कदमों को लागू करने में देरी की।
राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लेकर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि NTA से जुड़ी पिछली अनियमितताओं के बाद केंद्र सरकार ने के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। इस समिति ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए 101 सुझाव दिए थे।उन्होंने दावा किया कि इन सुझावों में 60 अल्पकालिक, 30 मध्यम अवधि और 6 दीर्घकालिक सिफारिशें शामिल थीं, लेकिन अब भी कई महत्वपूर्ण सिफारिशों पर अमल नहीं हुआ है।
‘भर्ती परीक्षाओं को लेकर सरकार ने किया गुमराह’
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने भर्ती परीक्षाओं को लेकर देश को गुमराह किया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिसंबर 2024 में घोषणा की थी कि राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों के अनुसार NTA अब भर्ती परीक्षाएं आयोजित नहीं करेगा।इसके बावजूद, जयराम रमेश ने दावा किया कि NTA ने बाद के वर्षों में कई भर्ती परीक्षाओं का आयोजन किया। उन्होंने सरकार से इस मामले में स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
NTA में स्थायी नेतृत्व को लेकर भी सवाल
कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि पेपर लीक जैसी घटनाओं के बावजूद लंबे समय तक NTA में पूर्णकालिक महानिदेशक की नियुक्ति नहीं की गई। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाने की जरूरत है।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में परीक्षा सुधारों को लागू करने की इच्छाशक्ति की कमी दिखाई देती है और इसी कारण छात्रों का भरोसा प्रभावित हो रहा है।
नंदन नीलेकणी की टास्क फोर्स पर उठाया सवाल
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री द्वारा नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में नई उच्चस्तरीय टास्क फोर्स गठित करने के फैसले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब पहले से गठित राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों पर पूरी तरह अमल नहीं हुआ है, तो नई समिति बनाने का उद्देश्य क्या है।उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों छात्रों और अभ्यर्थियों का भविष्य परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा है। इसलिए सरकार को पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
