नई दिल्ली। भारत के नॉन-लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर की ग्रोथ में आने वाले समय में कुछ नरमी देखने को मिल सकती है। Kotak Securities के मुताबिक, कमर्शियल इंश्योरेंस सेगमेंट में कमजोर प्रदर्शन और प्रीमियम पर दबाव इंडस्ट्री की कुल ग्रोथ को प्रभावित कर सकता है।
जुलाई 2026 में फसल बीमा को छोड़कर भारत के नॉन-लाइफ इंश्योरेंस उद्योग का ग्रॉस रिटन प्रीमियम (GWP) सालाना आधार पर करीब 12 प्रतिशत बढ़ा, जबकि जून में यह वृद्धि 18 प्रतिशत रही थी। इससे संकेत मिलता है कि सेक्टर की ग्रोथ रफ्तार कुछ धीमी हुई है।
हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस ने संभाली ग्रोथ
Kotak Securities की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में नॉन-लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर की ग्रोथ को मुख्य रूप से हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस से समर्थन मिला। हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम में करीब 26 प्रतिशत और मोटर इंश्योरेंस में 14 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई।
रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस इस ग्रोथ का प्रमुख आधार बना रहा। जुलाई में रिटेल हेल्थ प्रीमियम करीब 31 प्रतिशत बढ़ा। वहीं, मोटर इंश्योरेंस में Own Damage और Third Party दोनों कारोबार में मजबूती देखने को मिली।
कमर्शियल सेगमेंट में कमजोरी
दूसरी ओर, कमर्शियल इंश्योरेंस कारोबार पर दबाव बना हुआ है। खास तौर पर फायर इंश्योरेंस प्रीमियम में जुलाई में सालाना आधार पर 31 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके पीछे लगातार बनी हुई pricing pressure एक प्रमुख वजह है।
इंजीनियरिंग इंश्योरेंस की ग्रोथ भी धीमी होकर करीब 5 प्रतिशत रह गई। हालांकि, मरीन इंश्योरेंस में तस्वीर बेहतर रही और इस सेगमेंट में करीब 42 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।
प्राइवेट और स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरर्स का प्रदर्शन बेहतर
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों (SAHIs) और निजी जनरल इंश्योरर्स ने सरकारी क्षेत्र की कंपनियों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। जुलाई में SAHIs की ग्रोथ करीब 29 प्रतिशत रही, जबकि निजी खिलाड़ियों की ex-crop ग्रोथ लगभग 17 प्रतिशत रही। इसके मुकाबले PSU insurers की वृद्धि करीब 6 प्रतिशत रही।
Kotak Securities के अनुसार, हेल्थ इंश्योरेंस में मजबूत प्रदर्शन के चलते SAHIs और निजी बीमा कंपनियां लगातार मार्केट शेयर हासिल कर रही हैं।
आगे कैसी रहेगी सेक्टर की तस्वीर?
विशेषज्ञों के मुताबिक, हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस की मजबूत मांग नॉन-लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर को आगे भी सहारा दे सकती है। हालांकि, कमर्शियल सेगमेंट में pricing pressure और कमजोर प्रीमियम ग्रोथ सेक्टर की कुल रफ्तार पर असर डाल सकती है।
