जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में NIA कोर्ट के फैसले के बाद जजमेंट कॉपी में दर्ज कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। फैसले में 25 फरवरी 2013 से लेकर 25 मई 2013 को हुए हमले तक की कथित साजिश, नक्सलियों की तैयारियों, जिम्मेदारियों के बंटवारे और हमले के दौरान की घटनाओं का विस्तार से उल्लेख किया गया है। मामले में विशेष NIA अदालत ने 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है।
जजमेंट के अनुसार, 25 फरवरी 2013 को साउथ रीजनल यूनिफाइड कमांड की बैठक में झीरम घाटी में बड़ी घटना को अंजाम देने की योजना पर चर्चा हुई थी। फैसले में उल्लेख है कि TCOC के दौरान दरभा डिवीजन में बड़ी घटना को अंजाम देने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके बाद झीरम घाटी हमले के संचालन की जिम्मेदारी बारसे देवा और सुरेंद्र को दिए जाने की बात सामने आई। जजमेंट में नक्सली कमांडर जयलाल को CRC कंपनी-2 की टुकड़ी के साथ दरभा डिवीजन भेजे जाने का भी उल्लेख किया गया है।
फैसले में यह भी बताया गया है कि हमले की तैयारी के दौरान अलग-अलग लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। कुछ लोगों को एंबुश के लिए जगह चुनने की जिम्मेदारी दी गई, जबकि कुछ को हथियार, राशन और अन्य जरूरी सामान जुटाने का काम सौंपा गया था। जांच में नक्सली नेताओं गणपति और रमन्ना की मंजूरी का भी उल्लेख किया गया है। फैसले में सुरेंद्र, बारसे देवा, जयलाल, विनोद और सोनाधार समेत कई अन्य लोगों की भूमिका का जिक्र किया गया है।
25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला झीरम घाटी से गुजर रहा था। इसी दौरान काफिले पर नक्सली हमला हुआ था। NIA के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार इस हमले में 27 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 38 लोग घायल हुए थे। मृतकों में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत कई प्रमुख नेता शामिल थे।
जजमेंट में हमले के दौरान हथियार लूटे जाने का भी उल्लेख किया गया है। फैसले में AK-47, INSAS, MM पिस्टल और SLR जैसे हथियारों का जिक्र है। इसके अलावा नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कवासी लखमा को बंधक बनाए जाने की घटना का भी उल्लेख जजमेंट में किया गया है।
NIA की जांच में बड़ी संख्या में गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों को अदालत के सामने पेश किया गया। जजमेंट में 101 गवाहों के बयान और 207 दस्तावेजी साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है। फैसले में कुछ आरोपियों के बयानों को भी साक्ष्य के तौर पर चर्चा में लिया गया है। इनमें चैतू लेकाम के बयान का उल्लेख करते हुए घटना के दिन काफिले पर गोली चलाने की कथित भूमिका सामने रखी गई है। इसके अलावा कुछ आरोपियों पर हथियार लूटने, नक्सलियों के लिए सामान पहुंचाने और हमले से पहले हुई बैठकों में शामिल होने जैसी भूमिकाओं का उल्लेख किया गया है।
मामले में कुल 39 लोगों को आरोपी बनाए जाने की बात जजमेंट और जांच से जुड़े रिकॉर्ड में सामने आती है। हालांकि सभी आरोपियों के खिलाफ एक साथ ट्रायल नहीं चला। 11 आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई हुई, जिनमें से एक की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। इसके बाद शेष 10 आरोपियों को अदालत ने दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। वहीं मामले से जुड़े कई अन्य आरोपी अब भी फरार बताए जाते हैं और उनके संबंध में कार्रवाई अलग स्तर पर जारी है।
NIA कोर्ट ने अपने फैसले में 26/11 मुंबई आतंकी हमले का भी संदर्भ दिया। अदालत ने मुंबई हमले में साजिश और उसके बाद हमले को अंजाम दिए जाने की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए झीरम घाटी मामले में भी कथित आपराधिक साजिश और उसके क्रियान्वयन पर विचार किया। अदालत ने मामले की गंभीरता और दोषियों की भूमिका को देखते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई।
झीरम घाटी हमले को 13 साल से अधिक समय बीतने के बाद यह फैसला आया है। NIA ने 2013 में मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। जांच के दौरान कई आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की गई। अब विशेष NIA अदालत के फैसले के बाद जजमेंट में दर्ज साजिश, हमले की तैयारी और आरोपियों की कथित भूमिकाओं से जुड़ी जानकारियां सामने आने के बाद झीरम घाटी हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में है।
