वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब ईरानी विमानन क्षेत्र पर अमेरिकी दबाव और बढ़ गया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने चेतावनी दी है कि ईरानी एयरलाइंस का अंतरराष्ट्रीय संचालन पूरी तरह प्रभावित हो सकता है। अमेरिका ने विदेशी कंपनियों को भी संकेत दिया है कि यदि वे ईरानी एयरलाइंस को सेवाएं या अन्य सहायता देती रहीं, तो उन्हें कड़े सेकेंडरी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिकी प्रशासन पहले ही ईरान के विमानन क्षेत्र से जुड़े कई संस्थानों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगा चुका है। सितंबर में अमेरिकी ट्रेजरी ने ईरानी विमानन क्षेत्र से जुड़े 36 नए प्रतिबंधों की घोषणा की थी। इनका दायरा ईरानी एयरलाइंस के साथ-साथ उन विदेशी कंपनियों तक भी बढ़ाया गया, जिन पर ईरान को विमान, कलपुर्जे या अन्य विमानन संबंधी सहायता उपलब्ध कराने का आरोप है।
एयरलाइंस के साथ इन कंपनियों पर भी बढ़ेगा दबाव
अमेरिका की चेतावनी का असर केवल ईरानी एयरलाइंस तक सीमित नहीं रहने वाला है। ईरानी विमानन कंपनियों को सेवाएं देने वाले एयरपोर्ट, टिकटिंग एजेंसियां, ईंधन आपूर्तिकर्ता और ग्राउंड-हैंडलिंग कंपनियां भी अमेरिकी कार्रवाई के दायरे में आ सकती हैं।
अमेरिकी प्रशासन की नीति का उद्देश्य ईरान के साथ कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। अगस्त में भी अमेरिका ने ईरान से जुड़े कारोबार में शामिल विदेशी कंपनियों के खिलाफ सेकेंडरी प्रतिबंधों की चेतावनी दी थी।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर क्या होगा असर?
अगर विदेशी विमानन और सेवा प्रदाता कंपनियां अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से ईरानी एयरलाइंस से दूरी बनाती हैं, तो ईरान की अंतरराष्ट्रीय हवाई कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है। इससे टिकटिंग, ईंधन, विमान रखरखाव और ग्राउंड सेवाओं जैसी जरूरी सुविधाओं पर भी दबाव बढ़ सकता है।
रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिबंधों का हालिया विस्तार ईरान के विमानन क्षेत्र को कमजोर करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इसमें विदेशी मध्यस्थों और उन कंपनियों को भी निशाना बनाया गया है जो ईरानी विमानन क्षेत्र को तकनीकी या लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराती हैं।
ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति
अमेरिका ने हाल के महीनों में ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए तेल, शिपिंग, वित्त, डिजिटल एसेट्स और विमानन समेत कई क्षेत्रों में प्रतिबंधों का विस्तार किया है। अमेरिकी ट्रेजरी ने इसे ईरान की अंतरराष्ट्रीय आर्थिक गतिविधियों को सीमित करने की व्यापक मुहिम के रूप में आगे बढ़ाया है।
ऐसे में ईरानी एयरलाइंस पर बढ़ती पाबंदियां देश की अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाओं और विमानन से जुड़े कारोबार के लिए नई चुनौती बन सकती हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि विदेशी एयरपोर्ट, सेवा प्रदाता और अन्य कंपनियां अमेरिकी चेतावनियों के बाद क्या कदम उठाती हैं।
