लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की सियासत में नए समीकरण बनने लगे हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर सीटों की दावेदारी का मुद्दा धीरे-धीरे सामने आने लगा है। कांग्रेस नेता इमरान मसूद के हालिया बयानों को इसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।इमरान मसूद ने दावा किया है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ आने से ही समाजवादी पार्टी को बड़ी सफलता मिली और वह 37 लोकसभा सीटें जीतने में सफल रही। उन्होंने यह भी कहा कि गठबंधन की जरूरत कांग्रेस से ज्यादा सपा को थी।
वहीं, समाजवादी पार्टी की ओर से अब तक कांग्रेस को लेकर ज्यादा आक्रामक बयान नहीं आए हैं। पार्टी नेतृत्व की ओर से लगातार यही कहा जा रहा है कि दोनों दल मिलकर चुनाव लड़ेंगे। हालांकि, सीट बंटवारे को लेकर अंदरखाने बातचीत और दबाव की राजनीति शुरू हो चुकी है।
143 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम वोट का असर
राजनीतिक जानकारों के अनुसार कांग्रेस के तेवरों के पीछे उत्तर प्रदेश की करीब 143 विधानसभा सीटों का गणित अहम माना जा रहा है, जहां मुस्लिम मतदाता चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की स्थिति में हैं।उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोट लंबे समय से कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। कांग्रेस इन इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी के पास इमरान मसूद और इमरान प्रतापगढ़ी जैसे मुस्लिम चेहरे हैं, जो समुदाय के बीच सक्रिय हैं।
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी का पारंपरिक MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण रहा है। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में मुस्लिम वोट का एक हिस्सा कांग्रेस की ओर भी झुकता दिखाई दे रहा है। ऐसे में सपा के लिए कांग्रेस का साथ विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
70 सीटों पर 20 से 30 प्रतिशत मुस्लिम आबादी
आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश की करीब 70 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम आबादी 20 से 30 प्रतिशत के बीच है, जबकि लगभग 43 सीटों पर मुस्लिम आबादी 30 प्रतिशत से अधिक है। इसके अलावा करीब 36 सीटें ऐसी मानी जाती हैं, जहां मुस्लिम प्रत्याशी अपने दम पर जीत हासिल करने की स्थिति में हो सकते हैं।
वहीं, करीब 107 सीटों पर मुस्लिम मतदाता जीत-हार का फैसला प्रभावित कर सकते हैं। यही वजह है कि विधानसभा चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दल इस वोट बैंक को साधने की कोशिश में जुटे हैं।
सपा के लिए MY समीकरण और कांग्रेस की चुनौती
अखिलेश यादव लगातार यादव वोट बैंक के साथ अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और सवर्ण मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। अगर उन्हें मुस्लिम वोटों का भी मजबूत समर्थन मिलता है तो पार्टी 2024 लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को दोहराने की उम्मीद कर सकती है।हालांकि कांग्रेस भी इस बार गठबंधन में अपनी भूमिका और सीटों की संख्या बढ़ाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच बातचीत आसान नहीं रहने वाली है।
यूपी चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस के रिश्तों में दिख रही यह खींचतान आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीतिक दिशा तय करने वाले प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकती है।
