गौरेला। छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच विशेष पिछड़ी पंडो जनजाति के बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए जिला प्रशासन ने सराहनीय पहल की है। दुर्गम वनांचल क्षेत्र सांचरखुटरा में रहने वाले बच्चों के लिए गांव में ही अस्थायी स्कूल की व्यवस्था शुरू की गई है। साथ ही बच्चों को नियमित रूप से मध्यान्ह भोजन भी उपलब्ध कराया जाएगा।
बारिश बनी थी पढ़ाई में बाधा
गौरेला विकासखंड की ग्राम पंचायत पूटा के अंतर्गत आने वाले वनांचल बसाहट सांचरखुटरा के बच्चे बरसात के मौसम में उफनते नालों, कच्चे रास्तों और आवागमन की कठिनाइयों के कारण नियमित रूप से विद्यालय नहीं पहुंच पा रहे थे। इससे उनकी पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही थी।
कलेक्टर के निर्देश पर तत्काल हुई व्यवस्था
मामले की जानकारी मिलने पर कलेक्टर विजय दयाराम के. ने इसे गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग को तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए। निर्देशों के अनुसार शासकीय प्राथमिक शाला पूटा के सहायक शिक्षक चंद्रभान सिंह उइके और रणवीर सिंह बैगा की रोस्टर के आधार पर सांचरखुटरा में ड्यूटी लगाई गई है।
दोनों शिक्षक अपनी मूल शाला में उपस्थिति दर्ज कराने के बाद बारी-बारी से प्रतिदिन गांव पहुंचकर सामुदायिक भवन और आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को नियमित रूप से पढ़ाई कराएंगे। इससे बच्चों को बारिश के दौरान जोखिम भरे रास्तों से होकर स्कूल जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
गांव में ही मिलेगा मध्यान्ह भोजन
बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ उनके पोषण का भी विशेष ध्यान रखा गया है। इसके लिए शासकीय प्राथमिक शाला पूटा से आवश्यक खाद्य सामग्री सांचरखुटरा भेजी जाएगी। आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से बच्चों के लिए प्रतिदिन गर्म और पौष्टिक मध्यान्ह भोजन तैयार कर उपलब्ध कराया जाएगा।
शिक्षा हर बच्चे तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता
कलेक्टर विजय दयाराम के. ने कहा कि जिले के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि भौगोलिक कठिनाइयों या संसाधनों की कमी के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई बाधित नहीं होने दी जाएगी। प्रशासन संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ हर बच्चे तक शिक्षा और आवश्यक सुविधाएं पहुंचाने के लिए लगातार प्रयासरत है।
