रायपुर |केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद देशभर में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। इसी क्रम में क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष भाई वीरेंद्र सिंह तोमर ने इसे आंदोलनरत युवाओं की “आधी लेकिन ऐतिहासिक जीत” बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति के पद छोड़ने का मामला नहीं, बल्कि देश के लाखों युवाओं के संघर्ष और लोकतांत्रिक आवाज की ताकत का प्रतीक है।
तोमर ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में युवाओं के हितों के प्रति गंभीर है, तो केवल नेतृत्व परिवर्तन से काम नहीं चलेगा। शिक्षा व्यवस्था में व्यापक, पारदर्शी और स्थायी सुधार लागू करने होंगे, ताकि भविष्य में पेपर लीक, भर्ती घोटालों और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके। उनके अनुसार, “युवाओं की असली जीत तब होगी, जब शिक्षा व्यवस्था में जड़ से लेकर शीर्ष स्तर तक आमूलचूल परिवर्तन दिखाई देगा।”
उन्होंने लगातार सामने आए पेपर लीक मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने लाखों मेहनती छात्रों के सपनों को गहरा आघात पहुंचाया है। कई युवाओं ने वर्षों की मेहनत के बावजूद निराशा का सामना किया, जबकि कुछ मामलों में मानसिक तनाव और असहनीय परिस्थितियों ने परिवारों को भी गहरे दुख में डाल दिया। उन्होंने ऐसे सभी प्रभावित विद्यार्थियों और उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
तोमर ने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई सप्ताह से चल रहा युवाओं का आंदोलन केवल किसी एक परीक्षा या एक मंत्री के खिलाफ नहीं था, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय की मांग का आंदोलन बन चुका है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्र जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र से ऊपर उठकर केवल एक भारतीय नागरिक के रूप में अपने अधिकारों की आवाज बुलंद कर रहे थे।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कठिन परिस्थितियों और पुलिस कार्रवाई के बावजूद आंदोलनकारी युवाओं ने संयम और लोकतांत्रिक मूल्यों का परिचय दिया। उनके अनुसार, आंदोलन ने यह साबित किया कि शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से भी अपनी बात प्रभावी ढंग से रखी जा सकती है।
अपने वक्तव्य में तोमर ने प्रसिद्ध कवि दुष्यंत कुमार की चर्चित पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में बदलाव केवल नारों से नहीं, बल्कि निरंतर संघर्ष और सकारात्मक सोच से आता है। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं ने देश को यह संदेश दिया है कि जब नागरिक अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाते हैं, तो व्यवस्था को भी जवाब देना पड़ता है।
अंत में उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा संघर्ष का अंत नहीं, बल्कि शिक्षा सुधार की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है। अब देश के युवाओं की उम्मीद है कि सरकार केवल प्रशासनिक बदलाव तक सीमित न रहकर ऐसी नीतियां लागू करे, जो परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाए। उनका मानना है कि तभी लाखों छात्रों का विश्वास शिक्षा व्यवस्था में दोबारा स्थापित हो सकेगा और इस आंदोलन का वास्तविक उद्देश्य पूरा माना जाएगा।
