रायपुर। प्रदेश सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सुगमता से राशन उपलब्ध कराने के लिए लगातार नई व्यवस्थाएं लागू कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में कथित अनियमितताओं ने इन प्रयासों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राशन दुकानों में कम तौल, राशन की जगह नकद राशि दिए जाने और उपभोक्ताओं के साथ कथित मनमानी की शिकायतें सामने आती रही हैं। अब सरकार राशन वितरण व्यवस्था को और आसान बनाने के लिए ग्रेन एटीएम लगाने की तैयारी कर रही है।
बताया जा रहा है कि कुछ स्थानों पर राशन दुकानदारों द्वारा पात्र हितग्राहियों को राशन देने के बजाय कथित तौर पर करीब 17 रुपये प्रति किलो की दर से नकद राशि दिए जाने की शिकायतें हैं। वहीं कई जगहों पर निर्धारित मात्रा से कम राशन दिए जाने के आरोप भी लगते रहे हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि जहां 35 किलो राशन मिलना चाहिए, वहां 32 किलो और 12 किलो की जगह 10 किलो तक राशन दिए जाने की शिकायतें सामने आती हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि जब कोई जागरूक उपभोक्ता कम तौल या राशन वितरण में गड़बड़ी को लेकर सवाल उठाता है, तो कथित तौर पर उसे दबाव और दादागिरी का सामना करना पड़ता है। इससे गरीब परिवारों को मिलने वाले सरकारी राशन की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब ग्रेन एटीएम से राशन देने की तैयारी
खाद्य विभाग राशन वितरण व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए ग्रेन एटीएम जैसी तकनीक का इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पात्र उपभोक्ताओं को आसानी से और निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। मशीनों के जरिए वितरण होने से कम तौल और मानवीय हस्तक्षेप जैसी शिकायतों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
हालांकि, सवाल यह है कि इन मशीनों की स्थापना के बाद इनके रखरखाव और संचालन की ठोस व्यवस्था क्या होगी? यदि मशीनें खराब हुईं या उनका नियमित मेंटेनेंस नहीं हुआ, तो गरीब हितग्राहियों को फिर उसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
रायपुर के बस स्टॉप जैसी स्थिति न हो जाए
ग्रेन एटीएम को लेकर सबसे बड़ी चिंता इसके रखरखाव को लेकर है। रायपुर स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत बनाए गए कई बस स्टॉप उचित रखरखाव के अभाव में जर्जर हालत में पहुंच गए हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि यदि ग्रेन एटीएम के लिए भी स्पष्ट मेंटेनेंस प्लान, तकनीकी सहायता और जवाबदेही तय नहीं की गई तो भविष्य में इन मशीनों की हालत भी खराब हो सकती है।
सरकार का उद्देश्य गरीबों तक राशन की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करना है, लेकिन इसके लिए केवल नई मशीनें लगाना पर्याप्त नहीं होगा। राशन दुकानों की नियमित निगरानी, कम तौल पर सख्त कार्रवाई, नकदीकरण की शिकायतों की जांच और ग्रेन एटीएम के लिए मजबूत रखरखाव व्यवस्था भी जरूरी होगी।
