नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मध्य प्रदेश में कथित 1,200 करोड़ रुपये के चावल घोटाले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि एथेनॉल उत्पादन के नाम पर सार्वजनिक वितरण और पोषण योजनाओं के लिए निर्धारित चावल का दुरुपयोग किया गया। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भ्रष्टाचार के मामलों में जवाबदेही नहीं निभाने का आरोप लगाया।
‘भ्रष्टाचार का मॉडल बन गया मध्य प्रदेश’
शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए खड़गे ने कहा कि मध्य प्रदेश में एक घोटाला खत्म नहीं होता कि दूसरा सामने आ जाता है। उनके अनुसार, एथेनॉल के नाम पर करीब 1,200 करोड़ रुपये का कथित चावल घोटाला सामने आया है।उन्होंने आरोप लगाया कि जिस चावल का उपयोग कुपोषित बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों के पोषण के लिए किया जाना था, उसे कथित रूप से मुनाफे के लिए दूसरे उपयोग में लगाया गया।
सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि करीब 5 लाख मीट्रिक टन चावल इस कथित अनियमितता का हिस्सा बना। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में राइस मिलरों, एथेनॉल कारोबार से जुड़े लोगों और सरकारी तंत्र की मिलीभगत रही। खड़गे ने कहा कि जनता के अधिकारों से जुड़े अनाज के साथ खिलवाड़ किया गया है।इसके अलावा उन्होंने हाल ही में सामने आए कथित भूमि घोटाले का भी जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में सरकारी परियोजनाओं से जुड़े इलाकों में जमीनों के लेनदेन को लेकर भी सवाल उठे हैं।
मोदी और शाह को भी घेरा
खड़गे ने कहा कि मध्य प्रदेश में व्यापमं घोटाले से लेकर पेपर लीक और अन्य कथित भ्रष्टाचार के मामलों तक कई गंभीर आरोप सामने आए हैं, लेकिन जवाबदेही तय नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भ्रष्टाचार के मुद्दों पर मौन हैं और जवाबदेही की भावना कमजोर हुई है।
बीजेपी की प्रतिक्रिया का इंतजार
खबर लिखे जाने तक कांग्रेस अध्यक्ष के इन आरोपों पर मध्य प्रदेश सरकार या भारतीय जनता पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
राजनीतिक माहौल गरमाया
मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। आने वाले दिनों में यदि सरकार या संबंधित एजेंसियों की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान या कार्रवाई सामने आती है, तो यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।
