रायपुर:
राजधानी रायपुर का टिकरापारा इलाका अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों का नया पनाहगाह बनता जा रहा है। पिछले डेढ़ साल में इस क्षेत्र से पुलिस ने कुल 15 अवैध घुसपैठियों को गिरफ्तार किया है, जबकि कई अन्य की तलाश अभी भी जारी है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कई लोगों ने भारतीय दस्तावेज तैयार करवाकर पासपोर्ट और वीजा तक हासिल कर लिए थे और सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे थे।
किराए के मकानों में रह रहे थे घुसपैठिए
- पुलिस जांच में सामने आया है कि पिछले 26 वर्षों में टिकरापारा क्षेत्र में किसी भी बांग्लादेशी ने संपत्ति या मकान नहीं खरीदा है, बल्कि वे सभी किराए के मकानों में रह रहे थे।
- टिकरापारा थाना क्षेत्र के धरमनगर में 4 घुसपैठिए पकड़े गए।
- बाकी 11 घुसपैठियों का ठिकाना संजय नगर और संतोषी नगर इलाका रहा है।
ऐसे हुआ फर्जी दस्तावेजों का खेल
पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के अनुसार, हाल ही में पकड़े गए अवैध घुसपैठियों—शेख रेहान (31 वर्ष) और जमाल करीम (42 वर्ष)—से पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ है। रेहान पिछले 26 साल से और जमाल 13 साल से रायपुर में रह रहा था।
जांच में पता चला कि तत्कालीन पार्षद की लिखित अनुशंसा (चिट्ठी) के आधार पर इनके फर्जी पहचान पत्र और वोटर आईडी तैयार किए गए। इन्हीं दस्तावेजों को आधार बनाकर बाद में उनके राशन कार्ड, आधार कार्ड और अन्य शासकीय कागजात बनवाए गए। आरोपी जमाल ने ओडिशा की एक महिला से शादी की है और उसके बच्चे भी यहीं रह रहे हैं। ये सभी लोग शासन से मुफ्त राशन का लाभ ले रहे थे।
कार्रवाई का क्रम और फरार आरोपी
- फरवरी 2025: रायपुर पुलिस ने पहली बार मोहम्मद इस्माइल, शेख अकबर और शेख साजन को पकड़ा। तीनों विदेश भागने की फिराक में थे और उन्होंने पासपोर्ट-वीजा भी बनवा लिया था। फिलहाल तीनों जेल में हैं।
- जून 2025: एक ही परिवार के 5 लोगों समेत कुल 10 बांग्लादेशियों को पकड़ा गया, जिन्हें बाद में डिपोर्ट (देश निकाला) कर दिया गया।
- मास्टरमाइंड फरार: घुसपैठियों के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाला मुख्य संदिग्ध शेख अली पिछले डेढ़ साल से फरार है। हालांकि उसकी पत्नी और बच्चे रायपुर में ही हैं, लेकिन अली पुलिस के हाथ नहीं लग सका है। चर्चा है कि मिलीभगत के कारण वह समय रहते बच निकला।
तत्कालीन पार्षद पर कार्रवाई की अनुशंसा लंबित
दस्तावेजों की गहन जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि तत्कालीन पार्षद की चिट्ठी के जरिए ही इन घुसपैठियों की पहचान को प्रमाणित किया गया था। इस खुलासे के बाद पुलिस ने तत्कालीन पार्षद पर कार्रवाई की अनुशंसा की है, लेकिन मामले में अब तक ठोस प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हो पाई है।
आधी दर्जन महिलाओं और बुजुर्गों की तलाश
पुलिस के रडार पर अभी आधा दर्जन और संदिग्ध बांग्लादेशी हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। इनमें कुछ ऐसी महिलाएं भी शामिल हैं जो कम उम्र में यहां आई थीं और बाद में स्थानीय लोगों से शादी कर यहीं बस गईं। इसके अलावा कुछ बुजुर्ग दंपती भी शामिल हैं जो अपने फोन बंद कर भूमिगत हो गए हैं।
कागजों तक सीमित रह गई स्पेशल टास्क फोर्स (STF)
राज्य के सभी जिलों में अवैध घुसपैठियों की पहचान और धरपकड़ के लिए पिछले साल स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन किया गया था, जिसकी जिम्मेदारी एडिशनल एसपी रैंक के अधिकारियों को दी जानी थी। रायपुर में कमिश्नरी प्रणाली लागू होने के बाद इस टास्क फोर्स की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से किसी अधिकारी को नहीं सौंपी गई है। स्थिति यह है कि हर महीने के पहले सप्ताह में गृह विभाग को भेजी जाने वाली एसटीएफ की कार्रवाई की रिपोर्ट सिर्फ कागजों तक ही सिमट कर रह गई है और मैदानी स्तर पर इसकी बैठकें तक नहीं हो रही हैं।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई जारी
पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों के दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच के लिए कलेक्टर कार्यालय और आधार केंद्र को पत्र लिखकर रिकॉर्ड मांगे गए हैं। अन्य संदिग्धों की भी पहचान की जा रही है और जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी शिकंजा कसा जाएगा।
