बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड में बारिश के साथ एक बार फिर मलेरिया का खतरा बढ़ने लगा है। क्षेत्र के औरापानी और नवाडीह गांव में चार बच्चों में मलेरिया की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। संक्रमित सभी बच्चों को बेहतर इलाज के लिए सिम्स (SIMS) अस्पताल, बिलासपुर रेफर किया गया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है।मलेरिया के नए मामलों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार कैंप लगाकर लोगों की जांच कर रही है। वहीं, जिला प्रशासन भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है ताकि संक्रमण को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
एक ही परिवार के तीन बच्चे मिले संक्रमित
जानकारी के अनुसार, औरापानी गांव के जंगल क्षेत्र में रहने वाले रामलाल यादव के परिवार के छह सदस्यों में से तीन बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। बच्चों को तेज बुखार, कमजोरी और शरीर में दर्द की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच की। जांच रिपोर्ट में तीनों बच्चे, जिनकी उम्र लगभग 10 से 14 वर्ष के बीच है, मलेरिया से संक्रमित पाए गए।इसी दौरान नवाडीह गांव में भी एक अन्य बच्चे की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता और बढ़ गई। चारों संक्रमित बच्चों को तत्काल सिम्स अस्पताल भेजा गया, जहां उनका इलाज जारी है।
कलेक्टर ने किया प्रभावित गांवों का दौरा
मामले की जानकारी मिलते ही जिला कलेक्टर ने स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ प्रभावित गांवों का दौरा किया। उन्होंने अस्पताल में भर्ती बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली और अधिकारियों को गांवों में व्यापक सर्वे, समय पर जांच, दवाओं की उपलब्धता तथा उपचार व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।कलेक्टर ने कहा कि मलेरिया के किसी भी संभावित मामले को गंभीरता से लिया जाए और संक्रमित मरीजों का तत्काल उपचार सुनिश्चित किया जाए, ताकि बीमारी का फैलाव रोका जा सके।
72 गांव पहले से मलेरिया प्रभावित
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कोटा विकासखंड के 72 गांव पहले से ही मलेरिया प्रभावित घोषित हैं। हर वर्ष मानसून के दौरान इन क्षेत्रों में मलेरिया के मामले सामने आते हैं। इस बार भी लगातार बारिश के कारण मच्छरों का प्रजनन तेजी से बढ़ा है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है।इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में रक्त जांच अभियान, दवा वितरण, फॉगिंग, लार्वा नियंत्रण और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान तेज कर दिए हैं। आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य टीम घर-घर पहुंचकर लोगों की जांच करने और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने में जुटी हुई हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से की अपील
स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, कमजोरी या शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। विभाग ने स्वयं मेडिकल स्टोर से दवा लेने से बचने की सलाह देते हुए कहा है कि समय पर जांच और इलाज से मलेरिया को गंभीर होने से रोका जा सकता है।इसके साथ ही लोगों से घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देने, नियमित साफ-सफाई रखने, मच्छरदानी का उपयोग करने और मच्छरों से बचाव के सभी उपाय अपनाने की अपील की गई है।
प्रशासन की सतर्कता, हालात पर लगातार नजर
फिलहाल चारों बच्चों का इलाज जारी है और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि प्रभावित गांवों में लगातार सर्वे और जांच अभियान जारी रहेगा। प्रशासन का उद्देश्य समय रहते संक्रमण की पहचान कर मलेरिया के फैलाव को रोकना है, ताकि अन्य ग्रामीणों को सुरक्षित रखा जा सके।
