रायपुर। कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा से कथित तौर पर 25 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में आरोपी शोएब ढेबर की तलाश के बीच रायपुर पुलिस विभाग में कार्रवाई सामने आई है। पुलिस की दबिश से पहले आरोपी के फरार होने के बाद एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) में पदस्थ दो आरक्षकों को लाइन अटैच किए जाने की जानकारी सामने आई है। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, आरक्षकों पर पुलिस की गोपनीय कार्रवाई से जुड़ी जानकारी लीक होने के आरोपों की जांच की जा रही है।
पुलिस की दबिश से पहले फरार हुआ शोएब
रिपोर्टों के अनुसार, रायपुर पुलिस ने शोएब ढेबर की तलाश में उसके संभावित ठिकानों पर एक साथ दबिश दी थी। इनमें पाम बेलाजिओ स्थित ठिकाने और बैरन बाजार स्थित पारिवारिक आवास समेत कई स्थान शामिल बताए गए हैं। हालांकि पुलिस टीमों के पहुंचने से पहले ही शोएब वहां से निकल गया। इसके बाद पुलिस कार्रवाई की जानकारी पहले लीक होने की आशंका सामने आई।
पुलिस अब शोएब की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत से दोबारा गिरफ्तारी की अनुमति मिलने के बाद उसकी तलाश तेज की गई है।
2 आरक्षक लाइन अटैच, सूचना लीक होने की जांच
मामले में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट के आरक्षक शिवम द्विवेदी और राहुल गौतम को लाइन अटैच किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में दोनों के खिलाफ कार्रवाई का उल्लेख है, जबकि अन्य रिपोर्टों में फिलहाल केवल शिवम द्विवेदी के लाइन अटैच किए जाने की पुष्टि का जिक्र है। इसलिए दोनों के खिलाफ कार्रवाई के अंतिम आधिकारिक विवरण की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
मीडिया रिपोर्टों में आरोप लगाया गया है कि पुलिस की छापेमारी से जुड़ी गोपनीय जानकारी आरोपी तक पहुंची थी। हालांकि लाइन अटैच किया जाना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि संबंधित पुलिसकर्मी ने जानबूझकर आरोपी की मदद की। विभागीय जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सूचना लीक कैसे हुई और इसमें किसकी भूमिका थी।

25 करोड़ की रंगदारी मामले में क्या है आरोप?
पूरा मामला कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा को कथित तौर पर 25 करोड़ रुपये की रंगदारी के लिए धमकी दिए जाने से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, 14 सितंबर को एक विदेशी नंबर से व्हाट्सऐप के जरिए धमकी मिलने की बात सामने आई थी। पुलिस जांच में शोएब ढेबर की भूमिका सामने आने के बाद उसकी गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई थी और बाद में दोबारा गिरफ्तारी के लिए अदालत से अनुमति ली गई।
पुलिस इस मामले में कथित धमकी, रंगदारी की मांग और आरोपी की भूमिका से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही है। इसी दौरान सामने आए 50 करोड़ रुपये की एक अन्य कथित धमकी के मामले से भी संभावित संबंध की जांच की खबरें सामने आई हैं।
अब पुलिस के सामने दोहरी चुनौती
शोएब ढेबर की तलाश के साथ-साथ पुलिस के सामने अपनी कार्रवाई से जुड़ी गोपनीय जानकारी लीक होने की जांच की चुनौती भी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि छापेमारी की जानकारी आरोपी तक कैसे पहुंची और क्या इसमें विभाग के किसी कर्मचारी की भूमिका थी।
डीसीपी क्राइम के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया है कि आरोपी की तलाश के लिए कई टीमें काम कर रही हैं और पुलिस उसे जल्द पकड़ने का प्रयास कर रही है।
गृह मंत्री विजय शर्मा पर भी उठ रहे सवाल
मामला राजधानी रायपुर और 25 करोड़ रुपये की कथित रंगदारी जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा होने के कारण अब पुलिस की कार्रवाई और विभागीय जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खासतौर पर यह सवाल चर्चा में है कि अगर पुलिस की गोपनीय कार्रवाई की जानकारी पहले ही बाहर पहुंची, तो इसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी और जांच का दायरा कहां तक जाएगा।
राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा से भी विपक्ष या अन्य राजनीतिक पक्ष इस मामले में पुलिस व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर सवाल उठा सकते हैं। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में गृह मंत्री की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पुलिस की कार्रवाई की जानकारी वास्तव में किस माध्यम से बाहर पहुंची और इसमें किन लोगों की भूमिका थी।
