नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत का रियल एस्टेट सेक्टर मजबूती बनाए रख सकता है। CareEdge Ratings की रिपोर्ट के मुताबिक, मजबूत आवासीय मांग, डेवलपर्स की बेहतर वित्तीय स्थिति और ऑफिस लीजिंग में लगातार बनी मजबूती सेक्टर को निकट अवधि के दबाव से बचाने में मदद कर सकती है।
2026 में 3.55 लाख घरों की बिक्री का अनुमान
CareEdge के अनुसार, 2026 में देश के शीर्ष छह शहरों में आवासीय यूनिट की बिक्री करीब 3.55 लाख रहने का अनुमान है। प्रीमियम और लग्जरी हाउसिंग सेगमेंट में मांग अपेक्षाकृत मजबूत रहने की उम्मीद है। इसमें हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स, संपन्न घरेलू खरीदारों और NRI की मांग अहम भूमिका निभा सकती है।
ऑफिस और वेयरहाउसिंग सेक्टर को भी सहारा
रिपोर्ट के मुताबिक, ऑफिस रियल एस्टेट में Global Capability Centres (GCCs) के विस्तार से मांग मजबूत बनी हुई है। 2026 में शीर्ष छह शहरों में Grade-A ऑफिस स्पेस की ग्रॉस एब्जॉर्प्शन 90 मिलियन वर्ग फुट से अधिक रहने का अनुमान है। वहीं, ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों की वजह से इंडस्ट्रियल और वेयरहाउसिंग रियल एस्टेट को भी संरचनात्मक समर्थन मिल रहा है।
महंगे क्रूड से बढ़ सकती है निर्माण लागत
हालांकि, पश्चिम एशिया संकट का असर सभी सेगमेंट पर एक जैसा नहीं होगा। CareEdge के मुताबिक, अगर लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं, तो ईंधन, परिवहन और निर्माण सामग्री की लागत बढ़ सकती है। इससे निर्माण लागत में करीब 2-3 फीसदी तक की बढ़ोतरी संभव है, जिसका सबसे ज्यादा दबाव शुरुआती चरण की परियोजनाओं और अफोर्डेबल हाउसिंग पर पड़ सकता है।
बड़े डेवलपर्स बेहतर स्थिति में
CareEdge का मानना है कि बड़े और संगठित डेवलपर्स बेहतर बैलेंस शीट और मजबूत लिक्विडिटी के कारण मौजूदा परिस्थितियों का सामना करने की स्थिति में हैं। वहीं, ज्यादा कर्ज वाले छोटे डेवलपर्स पर लंबे समय तक महंगाई और महंगी फाइनेंसिंग का दबाव बढ़ सकता है।
कुल मिलाकर, CareEdge के अनुसार पश्चिम एशिया संकट फिलहाल भारतीय रियल एस्टेट के लिए व्यापक मांग संकट से ज्यादा लागत और सावधानी का जोखिम है। मजबूत प्रीमियम हाउसिंग डिमांड, ऑफिस लीजिंग और संस्थागत निवेश के चलते सेक्टर के लचीले बने रहने की उम्मीद है।
