नई दिल्ली, 12 जून 2026
देश की आम जनता की जेब और रसोई के बजट को लेकर एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। खाने-पीने की चीजों (Food Items) के दाम बढ़ने और ईंधन (Fuel) की कीमतों में आई तेजी के कारण देश में खुदरा मुद्रास्फीति (Retail Inflation) की रफ्तार एक बार फिर तेज हो गई है। मई महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.93 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा शुक्रवार (12 जून) को जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है।
अप्रैल के मुकाबले मई में बढ़ी महंगाई की रफ्तार
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति इससे पिछले महीने यानी अप्रैल में 3.48 प्रतिशत पर थी। इसका सीधा मतलब यह है कि महज एक महीने के भीतर ही महंगाई की रफ्तार में बड़ा उछाल दर्ज किया गया है, जिसने मध्यमवर्गीय परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।
रसोई का बजट फेल: सब्जियां और खाद्य वस्तुएं हुईं महंगी
NSO के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि महंगाई बढ़ने के पीछे सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों का महंगा होना है:
- खाद्य मुद्रास्फीति में उछाल: मई महीने में खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति अप्रैल के 4.20 प्रतिशत से बढ़कर 4.78 प्रतिशत हो गई है।
- इन्होंने जेब पर डाला डाका: पिछले महीने टमाटर, अदरक, किशमिश और मुनक्का की कीमतों में सबसे ज्यादा उछाल देखा गया। इसके अलावा कीमती धातुओं से बने आभूषण (Jewelry) भी महंगे हुए हैं।
- यहाँ मिली थोड़ी राहत: राहत की बात यह रही कि आलू, मटर, जीरा के साथ-साथ मोटर कार, जीप और टू-व्हीलर जैसी चीजों की महंगाई दर सबसे कम दर्ज की गई।
पेट्रोल-डीजल की महंगाई का ‘डोमिनो इफेक्ट’
महंगाई की इस आग में घी डालने का काम पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने किया है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों (Global Energy Prices) में आई तेजी का सीधा असर भारतीय बाजारों पर दिख रहा है।
- पेट्रोल की कीमतें: अकेले मई महीने से लेकर अब तक पेट्रोल की खुदरा कीमतों में 7.4 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हो चुकी है।
- डीजल की कीमतें: इस अवधि में डीजल के दाम भी 8.4 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।
- चौतरफा असर: जब डीजल महंगा होता है, तो माल ढुलाई (Transportation Cost) बढ़ जाती है। इसके कारण फल, सब्जी और अन्य रोजमर्रा के सामानों की ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने से वे अपने आप महंगे हो जाते हैं।
भविष्य के खतरे को देखते हुए RBI अलर्ट, बढ़ाया अनुमान
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में ब्याज दरें (Repo Rate) तय करने के लिए इसी खुदरा महंगाई दर (CPI) को मुख्य आधार मानता है। केंद्र सरकार ने आरबीआई को महंगाई दर 4 प्रतिशत (2% ऊपर या नीचे के दायरे में) रखने का लक्ष्य दिया है।
हालांकि, मौजूदा महंगाई दर (3.93%) अभी भी 4% के तय लक्ष्य के नीचे है, लेकिन भविष्य के जोखिमों को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने सतर्कता बढ़ा दी है।
क्या आम जनता को मिलेगी राहत?
आर्थिक जानकारों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं और मानसून ने समय पर राहत नहीं दी, तो आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई 4% के स्तर को पार कर सकती है। ऐसे में आरबीआई द्वारा आने वाले समय में लोन की ब्याज दरों (EMI) में कटौती की उम्मीदें भी धूमिल होती दिख रही हैं।