नागपुर: भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल BrahMos Missile के निर्यात को लेकर बड़ी प्रगति सामने आई है। भारत और Vietnam के बीच ब्रह्मोस मिसाइल निर्यात समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के प्रमुख Jaiteerth Joshi ने बताया कि दोनों देशों के बीच बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है और अब केवल कुछ सरकारी मंजूरियां शेष हैं।नागपुर में ब्रह्मोस कार्यक्रम के लिए 100वें स्वदेशी बूस्टर के प्रेषण के अवसर पर उन्होंने कहा कि वियतनाम के अलावा पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्रों के कई अन्य देशों के साथ भी मिसाइल निर्यात को लेकर चर्चा चल रही है। आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद इन देशों के नाम सार्वजनिक किए जाएंगे।
- स्वदेशीकरण और लागत घटाने पर जोर
ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने पिछले डेढ़ वर्ष में मिसाइल प्रणाली की लागत कम करने और स्वदेशीकरण बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। कंपनी के अनुसार, वैल्यू इंजीनियरिंग के जरिए कच्चे माल की लागत में लगभग 24 प्रतिशत और विनिर्माण से जुड़ी लागत में करीब 10 प्रतिशत की कमी लाई गई है। अगले एक-दो वर्षों में भारतीय घटकों की कुल लागत में लगभग 20 प्रतिशत तक और कमी आने की उम्मीद है।
- ब्रह्मोस-एनजी और नए संस्करणों पर काम
कंपनी भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए BrahMos-NG और अधिक मारक क्षमता वाले नए संस्करण विकसित कर रही है। उन्नत कंपोजिट सामग्री के उपयोग से मिसाइल को हल्का और अधिक प्रभावी बनाने के लिए भी अनुसंधान जारी है। अंतिम तकनीकी विशेषताएं परीक्षण और डिजाइन सत्यापन के बाद तय की जाएंगी।
- ऑपरेशन सिंदूर में वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण का दावा
ब्रह्मोस प्रमुख ने दावा किया कि हाल ही में Operation Sindoor के दौरान मिसाइल का वास्तविक परिस्थितियों में उपयोग कर परीक्षण किया गया। उनके अनुसार, यह पहली बार था जब ब्रह्मोस प्रणाली का मूल्यांकन सीधे ऑपरेशनल माहौल में किया गया, जिससे इसकी क्षमता और विश्वसनीयता साबित हुई।
- रूस के साथ उत्पादन बढ़ाने पर चर्चा
बढ़ती घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग को देखते हुए भारत और Russia के बीच उत्पादन क्षमता बढ़ाने को लेकर भी बातचीत चल रही है। कंपनी का मानना है कि आने वाले वर्षों में ब्रह्मोस की मांग और तेज़ी से बढ़ सकती है।
- 100वां स्वदेशी बूस्टर और स्वदेशी वारहेड
कार्यक्रम के दौरान ब्रह्मोस के 100वें स्वदेशी बूस्टर को रवाना किया गया, जिसे स्वदेशीकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। पहले यह बूस्टर रूस से आयात किया जाता था, लेकिन अब इसका निर्माण भारत में हो रहा है। कंपनी ने स्वदेशी वारहेड के परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं और जल्द ही आयातित वारहेड की जगह भारतीय वारहेड का उपयोग शुरू किया जा सकता है।
- ब्रह्मोस की प्रमुख विशेषताएं
- भारत और रूस की संयुक्त परियोजना।
- लगभग मैक 2.8 की सुपरसोनिक गति।
- जमीन, समुद्र, पनडुब्बी और लड़ाकू विमान से लॉन्च करने की क्षमता।
- फायर एंड फॉरगेट तकनीक से लैस।
- भूमि और समुद्री दोनों लक्ष्यों पर सटीक हमला।
- कम ऊंचाई पर उड़ान भरकर रडार से बचने की क्षमता।
- तेज गति के कारण इंटरसेप्ट करना बेहद कठिन।
- भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना में तैनात।
- भारत के रक्षा निर्यात को मिलेगी नई ताकत
विशेषज्ञों का मानना है कि वियतनाम के साथ संभावित ब्रह्मोस सौदा भारत की रक्षा निर्यात रणनीति के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है। इससे न केवल भारत की सामरिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भारतीय रक्षा उद्योग की साख भी बढ़ेगी। चीन के पड़ोसी देश वियतनाम को ब्रह्मोस की आपूर्ति क्षेत्रीय सामरिक संतुलन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
