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फुटपाथ पर चलना मौलिक अधिकार, पैदल यात्रियों की सुरक्षा को सुप्रीम कोर्ट ने दी सर्वोच्च प्राथमिकता

नई दिल्ली, 19 जून। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि फुटपाथ पर सुरक्षित रूप से चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है और इसे सड़कों पर मोटर वाहनों की आवाजाही से कम नहीं आंका जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि पैदल चलने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(D) और अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित स्वतंत्रता एवं गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और ए. एस. चंदुरकर की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि जहां भी सड़कें हैं, वहां पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित फुटपाथ का निर्माण और उसका नियमित रखरखाव सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की कानूनी जिम्मेदारी है। अदालत ने कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि ऐसा दायित्व है जिसे लागू कराया जा सकता है।

  • सड़कें केवल वाहनों के लिए नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सार्वजनिक सड़कें केवल मोटर वाहनों के उपयोग के लिए नहीं होतीं, बल्कि पैदल चलने वालों का भी उन पर समान अधिकार है। सुरक्षित फुटपाथ, पैदल पार पथ और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है, ताकि नागरिक बिना किसी खतरे के आवाजाही कर सकें।

  • पांच वर्षीय बच्चे की मौत से जुड़ा मामला

यह फैसला एक मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले की सुनवाई के दौरान आया। मामले में पांच वर्षीय एक बच्चे की मौत हो गई थी। बच्चे को उसके पिता स्कूल ले जा रहे थे, तभी पीछे से आए एक टैंकर ने उसे टक्कर मार दी। दुर्घटना में बच्चे को गंभीर चोटें आईं और उसकी मौत हो गई। जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां न तो फुटपाथ था और न ही सुरक्षित क्रॉसिंग की व्यवस्था।मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माना कि पैदल यात्रियों के लिए बुनियादी सुरक्षा सुविधाओं का अभाव भी दुर्घटना के कारणों में शामिल था।

  • मुआवजा बढ़ाकर 11.44 लाख रुपये

अदालत ने पीड़ित परिवार को राहत देते हुए बच्चे के पिता को दिए जाने वाले मुआवजे की राशि बढ़ाकर 11,44,628 रुपये कर दी। साथ ही संबंधित पक्ष को यह राशि दो महीने के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें पहले निर्धारित मुआवजे की रकम को कम कर दिया गया था।

  • फैसले का व्यापक असर

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय देशभर में सड़क सुरक्षा और शहरी ढांचे को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश साबित होगा। फैसले के बाद नगर निकायों और सड़क निर्माण एजेंसियों पर पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित फुटपाथ और सुविधाएं विकसित करने की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाएगी।

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