चंडीगढ़/गुरुग्राम: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े कथित विवादित वीडियो मामले ने अब नया और सनसनीखेज मोड़ ले लिया है। जिस वीडियो को लेकर सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को ‘पंथ विरोधी’ और ‘गुरु विरोधी’ करार दिया था, उसी मामले में अब एक कथित फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार कराने की साजिश का खुलासा हुआ है।
गुरुग्राम के डीएलएफ क्षेत्र में दर्ज एफआईआर के अनुसार, वायरल वीडियो को फर्जी साबित करने के लिए कथित तौर पर एक नकली फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करवाई गई। इस मामले में दो लोगों—स्वपन शर्मा और जसनदीप—के नाम सामने आए हैं, जिनकी गिरफ्तारी के बाद पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
- क्या है पूरा मामला?
कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर एक कथित आपत्तिजनक वीडियो वायरल हुआ था, जिसे मुख्यमंत्री भगवंत मान का बताया गया। वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक और धार्मिक विवाद खड़ा हो गया। हालांकि भगवंत मान ने शुरुआत से ही इस वीडियो को पूरी तरह फर्जी बताते हुए दावा किया कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं।
इसी बीच अकाल तख्त ने मामले को गंभीर मानते हुए मुख्यमंत्री पर तीखी टिप्पणी की थी, जिससे विवाद और गहरा गया।
- FIR में क्या दावा?
एफआईआर के मुताबिक, 16 जून 2026 की रात गुरुग्राम के एक होटल में बैठक हुई थी। आरोप है कि इसी बैठक में वायरल वीडियो को फर्जी साबित करने के लिए कथित फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार कराने की योजना बनाई गई।
जांच एजेंसियों का दावा है कि स्वपन शर्मा और जसनदीप इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित रिपोर्ट किसके कहने पर तैयार की गई और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।
- राजनीतिक घमासान तेज
मामले के सामने आने के बाद विपक्ष ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को निशाने पर ले लिया है। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया है कि पूरे प्रकरण के जरिए धार्मिक संस्थाओं को प्रभावित करने और जनमत को भ्रमित करने की कोशिश की गई।
बीजेपी नेता प्रवेश वर्मा ने कथित सीसीटीवी फुटेज जारी कर दावा किया कि इसमें स्वपन शर्मा, जसनदीप और अन्य लोग दिखाई दे रहे हैं। वहीं भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी मुख्यमंत्री पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
- भगवंत मान पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
हालांकि एफआईआर में मुख्यमंत्री भगवंत मान का नाम प्रत्यक्ष रूप से नहीं है, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक लाभ उन्हें मिल सकता था। इसी वजह से विपक्ष लगातार मुख्यमंत्री से जवाब मांग रहा है।
दूसरी ओर आम आदमी पार्टी और मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले ही वायरल वीडियो को फर्जी बता चुके हैं और आरोपों को राजनीतिक साजिश करार दे रहे हैं।
- आगे क्या?
अब जांच एजेंसियों की नजर कथित फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट, होटल में हुई बैठक और उससे जुड़े सभी लोगों पर है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और गिरफ्तारियों से यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला केवल एक वीडियो तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक खेल चल रहा था।
फिलहाल एक वीडियो, एक एफआईआर और दो नाम—स्वपन शर्मा और जसनदीप—पंजाब की राजनीति के केंद्र में हैं, जबकि मुख्यमंत्री भगवंत मान विपक्ष के निशाने पर बने हुए हैं।
