नई दिल्ली, 24 जून 2026: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक अनौपचारिक बैठक में पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने पर भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर पूरी तरह भारत का आंतरिक मामला है। भारत ने कहा कि इस मंच का उपयोग राजनीतिक एजेंडा चलाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वथानेनी हरीश ने पाकिस्तान की टिप्पणियों को “बेवजह और अनुचित” बताते हुए कहा कि किसी भी देश को ऐसे विषयों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने से बचना चाहिए जो उसकी संप्रभुता और आंतरिक मामलों से जुड़े हों।
बैठक का आयोजन चीन और पाकिस्तान की भागीदारी में एक Arria-Formula प्रारूप के तहत किया गया था। इस दौरान पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाने का प्रयास किया, जिस पर भारत ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह विषय भारत का आंतरिक मामला है और इस पर किसी बाहरी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
भारत ने यह भी रेखांकित किया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े गंभीर खतरों का समाधान करना है, न कि सदस्य देशों के आंतरिक मामलों पर चर्चा करना। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि सुरक्षा परिषद के मंचों का दुरुपयोग वैश्विक संस्थाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।
इसके अलावा भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुधारों और सुरक्षा परिषद के विस्तार की आवश्यकता पर भी जोर दिया। भारत का कहना है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाया जाना चाहिए। भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को कई देशों का समर्थन प्राप्त है, जिनमें ब्राज़ील, जर्मनी और जापान शामिल हैं।
भारत के इस स्पष्ट और दृढ़ रुख को कूटनीतिक हलकों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई दिल्ली ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह संदेश दिया है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इस मुद्दे पर किसी भी बाहरी टिप्पणी को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
- पाकिस्तान ने UNSC की अनौपचारिक बैठक में कश्मीर मुद्दा उठाया।
- भारत ने इसे “बेवजह” और “अनुचित” बताते हुए विरोध किया।
- भारत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर उसका आंतरिक मामला है।
- सुरक्षा परिषद के मंचों के राजनीतिक उपयोग पर चिंता जताई गई।
- भारत ने UNSC सुधार और स्थायी सदस्यता की मांग दोहराई।
