मुंबई: शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला आरोप लगाया है। संजय राउत का दावा है कि अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट से ₹2000 करोड़ की चोरी की गई और इस पैसे का इस्तेमाल राजनीतिक दलों (TMC और शिवसेना-UBT) के सांसदों को तोड़ने और पार्टियों में फूट डालने के लिए किया गया।
क्या है पूरा मामला?
यह बयान अयोध्या राम मंदिर में दान के पैसों में हुई कथित हेराफेरी के मामले में दर्ज हुई FIR के बाद आया है।
- मुख्य आरोपी अब भी ट्रस्ट में: संजय राउत ने आरोप लगाया कि, “खुद को ‘हिंदुत्ववादी’ कहने वाले लोग मंदिर से करोड़ों रुपये चुरा रहे हैं। यही पैसा राजनीति में आता है, जिससे सांसद खरीदे जाते हैं और पार्टियां तोड़ी जाती हैं। राम मंदिर से चुराए गए ₹2000 करोड़ का इस्तेमाल TMC और शिवसेना (UBT) के सांसदों को तोड़ने के लिए किया गया।” उन्होंने यह भी दावा किया कि घोटाले के मुख्य सूत्रधार अभी भी ट्रस्ट में काम कर रहे हैं।
- 7 से 7.5 करोड़ के घोटाले का आरोप: गौरतलब है कि अयोध्या के पूर्व सपा विधायक पवन पांडे ने आरोप लगाया था कि राम मंदिर के दान में करीब ₹7 करोड़ से ₹7.5 करोड़ की हेराफेरी हुई है।
सरकार और प्रशासन की कार्रवाई
इस मामले के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार और कानून व्यवस्था भी हरकत में आ गई है:
- SIT का गठन: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 14 जून को इस कथित घोटाले की जांच के लिए 3 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था।
- FIR दर्ज: उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, टिन्नू यादव, मनीष यादव और अन्य सहित 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
- मामला सुप्रीम कोर्ट में: इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका भी दायर की गई है, जिसमें इस पूरे वित्तीय विवाद और गायब हुए फंड की जांच कोर्ट की निगरानी में CBI के नेतृत्व वाली SIT से कराने की मांग की गई है।
