नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच जल विवाद एक बार फिर चर्चा में है। Indus Waters Treaty के निलंबन के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है। इसी बीच पाकिस्तान के पूर्व कार्यवाहक कानून मंत्री और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील Ahmer Bilal Soofi ने एक लेख में दावा किया है कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत कुछ परिस्थितियों में भारत के निर्माणाधीन बांधों को पूर्ण सुरक्षा नहीं मिल सकती।
- क्या है पूरा मामला?
India ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद Indus Waters Treaty को निलंबित करने की घोषणा की थी। इसके बाद चिनाब नदी पर कई जलविद्युत परियोजनाओं पर काम तेज किया गया। इनमें Pakal Dul Hydroelectric Project, Kiru Hydroelectric Project, Kwar Hydroelectric Project, Ratle Hydroelectric Project और Sawalkote Hydroelectric Project जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
इन परियोजनाओं को लेकर पाकिस्तान लगातार चिंता जता रहा है और दावा कर रहा है कि इससे उसके हिस्से के पानी पर असर पड़ सकता है।
- पाकिस्तानी विशेषज्ञ ने क्या कहा?
पाकिस्तानी अखबार डॉन में प्रकाशित अपने लेख में अहमर बिलाल सूफी ने कहा कि युद्ध के दौरान बांधों जैसी संरचनाओं को सामान्यतः सुरक्षा प्राप्त होती है। हालांकि उन्होंने तर्क दिया कि यदि किसी संरचना का उपयोग सैन्य उद्देश्य से किया जा रहा हो या उसे ऐसा माना जाए, तो अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत उसकी सुरक्षा पर सवाल उठ सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि निर्माणाधीन या खाली बांधों की कानूनी स्थिति, पानी से भरे हुए बांधों से अलग हो सकती है।
- भारत के बयानों का भी किया उल्लेख
सूफी ने अपने लेख में भारत के जल शक्ति मंत्री C. R. Patil के उस बयान का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भविष्य में पाकिस्तान को भारत के हिस्से का पानी नहीं मिलेगा। उन्होंने भारत के “ऑपरेशन सिंदूर” संबंधी बयानों का भी हवाला देते हुए दावा किया कि पाकिस्तान इन तर्कों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा सकता है।
- क्या वास्तव में डैम पर हमला करना वैध होगा?
अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून, विशेष रूप से Additional Protocol I to the Geneva Conventions के अनुच्छेद 56 के अनुसार, बांध, तटबंध और परमाणु ऊर्जा संयंत्र जैसी संरचनाओं को विशेष सुरक्षा प्राप्त होती है क्योंकि उन पर हमला बड़ी संख्या में नागरिकों के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है।
हालांकि किसी भी कानूनी व्याख्या का अंतिम निर्णय परिस्थितियों, तथ्यों और अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं की समीक्षा पर निर्भर करता है। किसी एक विशेषज्ञ की राय को अंतरराष्ट्रीय कानून की अंतिम या आधिकारिक व्याख्या नहीं माना जाता।
- निष्कर्ष
भारत और पाकिस्तान के बीच जल विवाद और सुरक्षा संबंधी मुद्दे लगातार संवेदनशील बने हुए हैं। पाकिस्तान के विशेषज्ञ द्वारा व्यक्त किए गए विचार एक कानूनी दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि भारत के बांधों पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत स्वतः वैध हो जाएगा। किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई का आकलन वास्तविक परिस्थितियों, लागू अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक प्रतिक्रिया के आधार पर किया जाएगा।
