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राम मंदिर चढ़ावा मामले में तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, जुलाई में होगी सुनवाई

नई दिल्ली: अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं और गड़बड़ियों की जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई तय प्रक्रिया के अनुसार ही होगी और इसमें किसी प्रकार की असाधारण जल्दबाजी की आवश्यकता नहीं है।

यह याचिका अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने मामले में एफआईआर दर्ज करने, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने तथा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि मामले में तत्काल सुनवाई की इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है। अदालत ने कहा कि यदि नियमित कार्यवाही के दौरान जुलाई में सुनवाई होती है, तो इससे कोई असाधारण स्थिति उत्पन्न नहीं होगी।

पीठ ने तत्काल सुनवाई की मांग खारिज करते हुए निर्देश दिया कि याचिका पर 12 से 17 जुलाई के सप्ताह में विचार किया जाएगा। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि आरोप गंभीर हैं और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक है, लेकिन अदालत ने इसे तत्काल सुनवाई का पर्याप्त आधार नहीं माना।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी ने किसी आपराधिक मामला दर्ज किए बिना जांच शुरू की, जिससे जांच प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं। उल्लेखनीय है कि 13 जून को चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के आरोप सामने आने के बाद राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट 23 जून को सरकार को सौंप चुकी है।

इस मामले में पुलिस अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच के दौरान श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान भी दर्ज किया गया है। आवश्यकता पड़ने पर ट्रस्ट के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों, जिनमें ट्रस्टी अनिल मिश्रा भी शामिल हैं, से पूछताछ की जा सकती है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले में किसी भी आरोप के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। अदालत ने केवल तत्काल सुनवाई की मांग अस्वीकार करते हुए नियमित प्रक्रिया के तहत जुलाई में सुनवाई करने का निर्णय लिया है।

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