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अवॉर्ड डिप्लोमेसी या सियासी जंग? पीएम मोदी को मिले सेशेल्स के सम्मान पर बीजेपी-कांग्रेस में ठनी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया पूर्वी अफ्रीकी देश सेशेल्स के दौरे और वहां मिले एक अंतरराष्ट्रीय सम्मान को लेकर देश में एक नया सियासी घमासान छिड़ गया है। सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी द्वारा पीएम मोदी को ‘गार्जियन ऑफ द बीच होराइजन’ (Guardian of the Blue Horizon) अवॉर्ड दिए जाने के बाद, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और सत्ताधारी बीजेपी के बीच सोशल मीडिया से लेकर बयानों तक तीखी बहस जारी है।

जहां बीजेपी इसे भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और पीएम मोदी की पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बता रही है, वहीं विपक्ष ने अवॉर्ड की विश्वसनीयता और इसके पीछे की टाइमिंग पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

1. विवाद की मुख्य वजह: स्पेलिंग मिस्टेक और ‘AI’ कनेक्शन

इस पूरे मामले ने तब तूल पकड़ा जब सोशल मीडिया पर अवॉर्ड के प्रशस्ति-पत्र (Citation) की तस्वीरें वायरल हुईं। आलोचकों और विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि इस सर्टिफिकेट में कई बड़ी गलतियां थीं:

  • स्पेलिंग की गलतियां: सर्टिफिकेट में ‘Republic’ की जगह ‘Repubblic’ और ‘Seychelles’ की जगह ‘Seycheeles’ लिखा हुआ था।
  • AI का इस्तेमाल: जब इस सर्टिफिकेट की सॉफ्टवेयर के जरिए जांच की गई, तो यह बात सामने आई कि इसे कथित तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया था।
  • विपक्ष ने यह भी दावा किया कि यह अवॉर्ड पीएम मोदी के पहुंचने से महज तीन दिन पहले ही बनाया गया था और वे इसे पाने वाले एकमात्र व्यक्ति हैं।
सेशेल्स सरकार ने जताया खेद

मामला बढ़ता देख सेशेल्स के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक सफाई जारी की। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन सर्कुलेट हुआ डॉक्यूमेंट असल में एक ‘वर्किंग ड्राफ्ट’ था, जिसे गलती से जारी कर दिया गया था और सार्वजनिक करने का उनका कोई इरादा नहीं था। सेशेल्स सरकार ने इस टाइपिंग और फॉर्मेटिंग की गलतियों (जिसमें ऑफिशियल सील की गलती भी शामिल है) पर गहरा खेद जताया है और अब ‘असली और विधिवत स्वीकृत’ संस्करण जारी कर दिया है।

2. ‘अवॉर्ड दीजिए, वे दौड़े चले आएंगे’ – कांग्रेस का तीखा हमला

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक वीडियो जारी कर पीएम मोदी और सरकार पर तीखा तंज कसा। कांग्रेस का कहना है:

विपक्ष ने इस दौरे के दौरान भारत द्वारा सेशेल्स को दी गई 175 मिलियन डॉलर (लगभग 1500 करोड़ रुपये) की वित्तीय सहायता पर भी सवाल उठाए। इस मदद में 125 मिलियन डॉलर की ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ और 50 मिलियन डॉलर का ‘ग्रांट’ (अनुदान) शामिल है। विपक्ष का आरोप है कि क्या यह सम्मान भारत द्वारा दी गई इस भारी-भरकम वित्तीय मदद से जुड़ा हुआ है?

3. बीजेपी का पलटवार: ‘क्या विपक्ष अवॉर्ड से जल गया है?’

बीजेपी ने विपक्ष के इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और देश के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला बताया है। बीजेपी के सोशल मीडिया हैंडल्स (जैसे ‘बीजेपी जेनजी’) ने कांग्रेस से सीधा सवाल पूछा है कि “क्या वे इस अवॉर्ड से जल गए हैं?”

बीजेपी ने अपनी सफाई में निम्नलिखित बातें कहीं:

  • ग्रीन लीडरशिप की पहचान: यह सम्मान पीएम मोदी के सस्टेनेबल ग्रोथ, क्लाइमेट एक्शन और पर्यावरण की देखभाल के प्रति उनकी वैश्विक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  • रणनीतिक साझेदारी: सेशेल्स के साथ भारत का जुड़ाव कोई ‘लेन-देन का सौदा’ नहीं है, बल्कि यह हिंद महासागर में दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय कूटनीति का हिस्सा है।
  • बीजेपी ने आरोप लगाया कि विपक्ष एक संप्रभु राष्ट्र द्वारा दिए गए अंतरराष्ट्रीय सम्मान का अनादर करके भारत के बढ़ते वैश्विक कद को कम दिखाने की कोशिश कर रहा है।
4. विदेशी दौरों और त्वरित अवॉर्ड्स का पुराना इतिहास?

इस विवाद के बीच वैश्विक मीडिया (जैसे ‘द गार्जियन’) और आलोचकों ने पीएम मोदी को पहले मिले कुछ अन्य पुरस्कारों का भी जिक्र किया है:

  • इजरायल (मेडल ऑफ द नेसेट): पिछले महीने पीएम मोदी के दौरे से ठीक पहले इजरायली संसद ने जल्दबाजी में यह सर्वोच्च सम्मान बनाया और वहां पहुंचते ही उन्हें नवाजा।
  • फिलिप कोटलर प्रेसिडेंशियल अवॉर्ड (2019): पीएम मोदी यह अवॉर्ड पाने वाले पहले व्यक्ति थे, लेकिन उसके बाद से यह किसी अन्य नेता को नहीं दिया गया और इसकी वेबसाइट भी निष्क्रिय है।
  • अन्य सम्मान: पिछले साल पीएम मोदी इथियोपिया का ‘ग्रेट ऑनर निशान’ और ‘ऑर्डर ऑफ द रिपब्लिक ऑफ त्रिनिदाद एंड टोबैगो’ पाने वाले पहले विदेशी राष्ट्राध्यक्ष बने थे।

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