रायपुर। राजधानी के नकटी गांव में तीन दिन पहले हुई करीब 80 मकानों पर बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में शुक्रवार को विस्थापित और प्रभावित परिवारों का गुस्सा फूट पड़ा। कांग्रेस नेताओं के नेतृत्व में प्रभावित ग्रामीणों ने न्याय की मांग को लेकर सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने कलेक्टोरेट में धरने के बाद सीधे मंत्री बंगले का घेराव करने के लिए पैदल मार्च निकाला, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें बलपूर्वक वहां से हटाया।
- कलेक्टोरेट पर धरना, नहीं पहुंचे जिम्मेदार अधिकारी
आंदोलन की शुरुआत में सैकड़ों की संख्या में पीड़ित परिवार और कांग्रेस नेता रायपुर कलेक्टोरेट पहुंचे। अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टोरेट परिसर के बाहर ही धरना दे दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इतनी बड़ी तादाद में बेघर हुए लोगों की सुध लेने के लिए कोई भी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। अधिकारियों के इस रवैये से नाराज होकर आंदोलनकारियों ने अपना रुख मंत्री बंगले की ओर कर लिया।
- ‘न्याय दो’ के नारों के साथ मंत्री बंगले का घेराव
कलेक्टोरेट से निकलने के बाद कांग्रेस नेताओं और ग्रामीणों ने एक विशाल पैदल मार्च निकाला। सरकार विरोधी नारेबाजी और ‘हक दो, न्याय दो’ के नारों के साथ प्रदर्शनकारी सीधे मंत्री बंगले का घेराव करने पहुंच गए। अचानक इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से सिविल लाइंस और वीआईपी सुरक्षा क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
- पुलिस के साथ झूमाझटकी, प्रदर्शनकारी हटाए गए
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। बंगले के बाहर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी बहस और हल्की झूमाझटकी भी हुई। पुलिस ने सुरक्षा घेरा तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे कांग्रेस नेताओं और ग्रामीणों को बलपूर्वक रोक दिया। काफी देर तक चले हंगामे के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और मौके से हटाया, तब जाकर स्थिति शांत हो सकी।
- क्या है पूरा मामला?
कांग्रेस ने इस पूरी कार्रवाई को ‘अमानवीय’ करार देते हुए चेतावनी दी है कि जब तक विस्थापित परिवारों को मुआवजा और रहने के लिए पक्का मकान नहीं मिल जाता, तब तक उनका यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।
