कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा फैसला लेते हुए सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए भोजन बजट में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी कर दी है। इसके साथ ही प्राथमिक विद्यालयों में संचालित मिड-डे मील योजना के बजट में भी वृद्धि की गई है। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य बढ़ती महंगाई के बीच मरीजों और बच्चों को बेहतर गुणवत्ता वाला पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है।
अस्पतालों में मरीजों को मिलेगा बेहतर और पौष्टिक भोजन
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को दिए जाने वाले पके हुए भोजन के लिए अब पहले से अधिक राशि खर्च की जाएगी। सरकार का मानना है कि बढ़े हुए बजट से भोजन की गुणवत्ता में सुधार होगा और मरीजों को संतुलित एवं पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराया जा सकेगा, जिससे उनके स्वास्थ्य लाभ में भी मदद मिलेगी।
महंगाई को देखते हुए लिया गया फैसला
मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद्य सामग्री और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में पुराने बजट में भोजन की गुणवत्ता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया था। इसी वजह से सरकार ने अस्पतालों और स्कूलों के भोजन बजट में बढ़ोतरी का फैसला लिया है, ताकि किसी भी स्तर पर गुणवत्ता से समझौता न करना पड़े।
मिड-डे मील योजना को भी मिली बड़ी राहत
राज्य सरकार ने प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए मिड-डे मील का प्रति छात्र बजट भी बढ़ा दिया है। इस फैसले से स्कूलों में बच्चों को अधिक पौष्टिक और बेहतर गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे बच्चों के पोषण स्तर में सुधार होगा और उनकी नियमित उपस्थिति तथा पढ़ाई पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों क्षेत्रों को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि मरीजों के लिए बेहतर भोजन व्यवस्था उनके जल्द स्वस्थ होने में मदद करेगी, जबकि स्कूली बच्चों को पौष्टिक भोजन मिलने से उनके शारीरिक और मानसिक विकास को मजबूती मिलेगी। यह फैसला राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जनहित में सरकार की बड़ी पहल
बढ़ती महंगाई के दौर में अस्पतालों के मरीजों और स्कूली बच्चों के भोजन पर अतिरिक्त खर्च करने का यह फैसला सरकार की जनकल्याणकारी सोच को दर्शाता है। उम्मीद की जा रही है कि इस पहल से लाखों मरीजों और विद्यार्थियों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा और सरकारी संस्थानों में भोजन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।
