रायपुर/नया रायपुर, 2 जुलाई 2026। नया रायपुर के नक्ती गांव में मंगलवार को प्रशासन द्वारा चलाए गए बड़े पैमाने के अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया। भारी पुलिस सुरक्षा के बीच 85 से अधिक मकानों पर बुलडोजर चलाए गए, जिससे दर्जनों परिवार बेघर हो गए। प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि यह कार्रवाई प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के निर्माण के लिए की गई है, जबकि प्रशासन इसे अतिक्रमण हटाने की नियमित कार्रवाई बता रहा है।कार्रवाई के दौरान नगर निगम, राजस्व विभाग, पुलिस, SDRF तथा अन्य प्रशासनिक विभागों के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। स्थानीय लोगों के अनुसार बड़ी संख्या में पुलिस बल और कई JCB मशीनों की मदद से मकानों को हटाया गया। कार्रवाई के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बनी रही और प्रभावित परिवारों ने रायपुर पहुंचकर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
“गरीबों की आवाज़ दबाने की कोशिश”—वीरेंद्र सिंह तोमर
क्षत्रिय करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं समाजसेवी वीरेंद्र सिंह तोमर ने इस कार्रवाई का कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि बिना समुचित पुनर्वास के गरीब परिवारों को उजाड़ना किसी भी संवेदनशील शासन के लिए उचित नहीं माना जा सकता।
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उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के सिर से छत छीन लेना मानवीय दृष्टि से गंभीर विषय है। उनका कहना था कि प्रशासन को पहले प्रभावित परिवारों के रहने की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए थी, उसके बाद ही किसी प्रकार की कार्रवाई की जानी चाहिए थी।
वीरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि घटना के बाद से लगातार प्रभावित परिवार उनसे संपर्क कर सहायता और न्याय की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि सभी प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल पुनर्वास, मुआवजा और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की जाए।
ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से नक्ती गांव में रह रहे थे। उनके अनुसार गांव में बिजली, पानी, सड़क, स्कूल, शौचालय सहित अन्य सरकारी सुविधाएं उपलब्ध थीं। ऐसे में उनका सवाल है कि यदि वे अतिक्रमणकारी थे, तो वर्षों तक शासन द्वारा सभी मूलभूत सुविधाएं क्यों उपलब्ध कराई जाती रहीं।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें केवल 48 घंटे का नोटिस दिया गया और पर्याप्त पुनर्वास व्यवस्था किए बिना मकान तोड़ दिए गए। उनका कहना है कि इस कार्रवाई से सैकड़ों लोगों के सामने रहने, बच्चों की पढ़ाई और रोज़गार का संकट खड़ा हो गया है।
विरोध प्रदर्शन और बढ़ा तनाव
बुलडोजर कार्रवाई के दौरान कई ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया। कुछ स्थानों पर पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। कार्रवाई के बाद बड़ी संख्या में प्रभावित परिवार रायपुर पहुंचे और न्याय तथा पुनर्वास की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए।
करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने भी प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रभावित परिवारों के समर्थन में प्रदर्शन किया।
प्रशासन का पक्ष
प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान अभी जारी नहीं किया गया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया के तहत की गई है। विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया आने के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
उठ रहे हैं कई अहम सवाल
- यदि भूमि किसी सरकारी परियोजना या विधायक कॉलोनी के लिए आवश्यक थी, तो प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था पहले क्यों नहीं की गई?
- वर्षों तक सरकारी सुविधाएं मिलने के बाद अचानक लोगों को अतिक्रमणकारी घोषित करने का आधार क्या था?
- क्या प्रभावित परिवारों को पर्याप्त समय और वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया गया था?
- क्या प्रशासन और ग्रामीणों के बीच कोई वैकल्पिक समाधान तलाशने का प्रयास किया गया?
फिलहाल निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर
नक्ती गांव की यह घटना अब सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। एक ओर प्रशासन अपनी कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है, वहीं प्रभावित परिवार और सामाजिक संगठन इसे मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए न्याय और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। अब सभी की निगाहें प्रशासन की विस्तृत प्रतिक्रिया और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर उठाए जाने वाले अगले कदमों पर टिकी हैं।
