रायपुर। राजधानी रायपुर के नकटी गांव में सोमवार तड़के हुए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद दर्जनों परिवार बेघर हो गए। ग्रामीणों का आरोप है कि सुबह करीब 4 बजे पहले इलाके की बिजली काटी गई और उसके बाद बुलडोजर चलाकर करीब 80 मकानों को ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के बाद कई परिवारों को खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ी।
प्रभावित लोगों का कहना है कि कार्रवाई इतनी अचानक हुई कि उन्हें अपना सामान तक सुरक्षित निकालने का पर्याप्त समय नहीं मिला। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं सहित कई परिवार पूरे दिन और रात खुले में रहने को मजबूर रहे। विस्थापितों ने प्रशासन पर बिना पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था के कार्रवाई करने का आरोप लगाया।
ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि जनप्रतिनिधियों की ओर से उन्हें पहले जो आश्वासन दिए गए थे, वे पूरे नहीं हुए। कुछ विस्थापितों ने सांसद पर भी उनके साथ किए गए वादों से मुकरने और गलत जानकारी देने का आरोप लगाया। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
वहीं, प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई नियमानुसार की गई। प्रशासन के अनुसार, संबंधित क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पूर्व निर्धारित थी और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया।
फिलहाल प्रभावित परिवारों की सबसे बड़ी चिंता रहने की व्यवस्था और रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल राहत, पुनर्वास और प्रभावित परिवारों के लिए वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने की मांग की है।
इस मामले को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने घटना की निष्पक्ष जांच तथा विस्थापित परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास देने की मांग उठाई है।
