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ममता बनर्जी के ‘ओल्ड गार्ड’ बनाम अभिषेक के ‘न्यू ब्रिगेड’ की जंग आई सामने, कल्याण बनर्जी के बयान से सियासत गर्म।

नई दिल्ली / कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस वक्त अपने इतिहास के सबसे बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रही है। पार्टी के कद्दावर और वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ खुला विद्रोह कर दिया है।

कल्याण बनर्जी का यह हमला ऐसे समय में आया है जब पूरी पार्टी ताश के पत्तों की तरह बिखरने की कगार पर है। टीएमसी के 58 विधायकों और 19 लोकसभा सांसदों ने बगावती तेवर अपनाते हुए अलग गुट बनाने की तैयारी कर ली है, जिससे ममता बनर्जी की सरकार और पार्टी दोनों पर अस्तित्व का संकट मंडराने लगा है।

वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने एक वीडियो जारी कर अभिषेक बनर्जी के खिलाफ अपना पूरा गुस्सा निकाला है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब अभिषेक के घमंडी रवैये के कारण पार्टी में काम करना नामुमकिन हो गया है।

कल्याण बनर्जी ने ममता बनर्जी को धर्मसंकट में डालते हुए सीधा अल्टीमेटम दे दिया है। उन्होंने कहा, “मैं ममता बनर्जी के साथ हूँ, लेकिन उन्हें यह तय करना होगा कि अगर वे अभिषेक के बिना पार्टी नहीं चला सकतीं, तो फिर मैं उनके साथ नहीं हूँ।”

पार्टी के भीतर केवल कल्याण बनर्जी ही नाराज नहीं हैं, बल्कि विधायकों और सांसदों की एक बहुत बड़ी फौज ने ममता और अभिषेक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है:

  • विधानसभा में टूट (58 विधायक बागी): टीएमसी के 58 विधायकों ने पार्टी से अलग होकर एक नया गुट बना लिया है। विधानसभा में उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नया नेता भी चुन लिया है, जो ममता सरकार के लिए बहुत बड़ा झटका है।
  • लोकसभा में दरार (19 सांसद अलग): पार्टी के करीब 19 लोकसभा सांसदों ने भी दिल्ली में अपना एक अलग गुट बनाने की कवायद तेज कर दी है।
  • राज्यसभा से इस्तीफों की झड़ी: राज्यसभा में भी पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव के बाद अब प्रकाश चिक बराइक ने भी संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

इस पूरी बगावत की सबसे दिलचस्प और रणनीतिक बात यह है कि बगावत करने वाले 58 विधायक, 19 सांसद या कल्याण बनर्जी—कोई भी नेता सीधे तौर पर ममता बनर्जी पर निशाना नहीं साध रहा है।

सभी बागी नेताओं की नाराजगी का केंद्र बिंदु अभिषेक बनर्जी का व्यवहार और उनकी कार्यशैली है। नेताओं का मानना है कि अभिषेक के मनमाने फैसलों और ‘अहंकार’ ने पुराने और वफादार नेताओं को हाशिए पर धकेल दिया, जिससे यह नौबत आई है।

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यह टीएमसी के इतिहास का सबसे काला दौर है। अब तक ममता बनर्जी के करिश्मे के दम पर पार्टी खड़ी रही है, लेकिन पहली बार घर के भीतर से इतनी बड़ी चुनौती मिली है।

अब गेंद ममता बनर्जी के पाले में है। उनके सामने दो ही रास्ते बचे हैं:

  1. या तो वे अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी के पर कतरें और नाराज पुराने नेताओं (ओल्ड गार्ड) को मनाकर सरकार और पार्टी बचाएं।
  2. या फिर अभिषेक बनर्जी के फैसलों के साथ खड़ी रहें, जिससे पार्टी में एक बड़ी टूट होना तय माना जा रहा है।

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