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राम मंदिर चंदा विवाद पर कांग्रेस का केंद्र सरकार पर निशाना, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच और चंदे का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग

नई दिल्ली। अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चंदे और चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने आरोप लगाया कि पूरे मामले में वास्तविक जिम्मेदार लोगों को बचाने के लिए लीपापोती की जा रही है। कांग्रेस ने इस प्रकरण की सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने तथा मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त नकद और वस्तु स्वरूप सभी चंदों का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी अपने बयान में कहा कि यदि भगवान राम के मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी या वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, तो यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि केवल कुछ इस्तीफों या सीमित प्रशासनिक कार्रवाई से मामले को समाप्त नहीं माना जा सकता और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

  • प्रधानमंत्री से जवाब देने की मांग

जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग करते हुए कहा कि मंदिर निर्माण के लिए देशभर से करोड़ों लोगों ने श्रद्धा के साथ योगदान दिया था। ऐसे में जनता को यह जानने का अधिकार है कि प्राप्त चंदे और अन्य दान का उपयोग किस प्रकार किया गया। उन्होंने कहा कि नकद और वस्तु के रूप में मिले सभी योगदानों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

  • नया ट्रस्ट गठित करने का सुझाव

कांग्रेस ने मौजूदा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग कर उसकी जगह शंकराचार्यों, धर्माचार्यों, संतों और विभिन्न धार्मिक परंपराओं के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए नया ट्रस्ट गठित करने की भी मांग की है। पार्टी का कहना है कि इससे मंदिर प्रबंधन में व्यापक प्रतिनिधित्व और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी।

  • एसआईटी जांच पर भी उठाए सवाल

कांग्रेस का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) पर जनता का पूर्ण विश्वास नहीं है। इसलिए मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए, ताकि जांच की निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे।

  • अशोक गहलोत ने भी उठाए गंभीर सवाल

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि यदि मंदिर निर्माण के लिए देशभर से प्राप्त चंदे में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है, तो इसकी पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित गड़बड़ियों की जानकारी पहले से होने के बावजूद मामले को दबाने की कोशिश की गई।

गहलोत ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को राम मंदिर आंदोलन के कारण व्यापक जनसमर्थन मिला था, इसलिए इस विषय पर सरकार की जवाबदेही और भी अधिक है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी बॉन्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जिस प्रकार चंदे का विवरण सार्वजनिक किया गया था, उसी प्रकार राम मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त चंदे का पूरा लेखा-जोखा भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

  • भाजपा या ट्रस्ट की प्रतिक्रिया का इंतजार

समाचार लिखे जाने तक भाजपा, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट या केंद्र सरकार की ओर से कांग्रेस के आरोपों और मांगों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

राम मंदिर देशभर के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चंदे और मंदिर प्रबंधन से जुड़े किसी भी विवाद पर राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग भी तेज होती दिखाई दे रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और संबंधित संस्थाएं इन आरोपों पर क्या रुख अपनाती हैं और जांच प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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