तेहरान/कीव: मध्य एशिया में एक बड़े सैन्य टकराव की आशंका उस समय टल गई, जब ईरान ने दावा किया कि उसने यूक्रेन के खिलाफ प्रस्तावित जवाबी हमले को अंतिम समय में रोक दिया। ईरान के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व कमांडर मेजर जनरल मोहसिन रेजाई के मुताबिक, यूक्रेन के तीन अहम ठिकानों पर हमला करने की पूरी तैयारी कर ली गई थी, लेकिन कीव की ओर से कथित तौर पर माफी और नुकसान की भरपाई का भरोसा मिलने के बाद सैन्य कार्रवाई स्थगित कर दी गई।
रेजाई के अनुसार, यह जवाबी कार्रवाई 25 जुलाई को कैस्पियन सागर में एक ईरानी जहाज पर हुए कथित यूक्रेनी हमले के बाद तय की गई थी। ईरान का आरोप है कि इस घटना में उसके पोत को नुकसान पहुंचा, जिसे उसने अपनी सुरक्षा और संप्रभुता पर सीधा हमला माना। इसके बाद ईरानी सेना ने जवाबी ऑपरेशन की तैयारी शुरू कर दी थी।
हालांकि, ईरान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यूक्रेन के किन तीन ठिकानों को निशाना बनाया जाना था। रेजाई ने अपने दावों के समर्थन में कोई सबूत भी सार्वजनिक नहीं किया है। दूसरी ओर, यूक्रेन की सरकार ने भी अब तक इन आरोपों या कथित माफी को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने घटना के बाद कहा था कि यूक्रेन को कथित हमले से हुए नुकसान की भरपाई करनी चाहिए। रिपोर्टों के अनुसार, यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबीहा के साथ बातचीत के दौरान दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हुई, जिसके बाद तनाव और बढ़ने से पहले हालात संभल गए।
2022 से लगातार तनाव में हैं दोनों देश
ईरान और यूक्रेन के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों से बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। वर्ष 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यूक्रेन ने ईरान पर रूस को शाहेद ड्रोन उपलब्ध कराने का आरोप लगाया था। बाद में रूस में इन ड्रोन के उत्पादन को लेकर भी दोनों देशों के बीच विवाद गहरा गया। ऐसे में यदि ईरान वास्तव में यूक्रेन पर हमला करता, तो यह संघर्ष एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच सकता था।
दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं
फिलहाल, ईरान के इस दावे की किसी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसी या आधिकारिक स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए तीन ठिकानों पर प्रस्तावित हमले और कथित ‘माफी’ से जुड़े दावों को आधिकारिक पुष्टि मिलने तक सावधानी के साथ देखा जाना चाहिए। हालांकि, इस घटनाक्रम ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव को लेकर नई चिंताएं जरूर बढ़ा दी हैं।
