नवा रायपुर। नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर जारी विवाद के बीच छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने पहली बार विस्तृत दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष सार्वजनिक किया है। बोर्ड का दावा है कि गांव के 77 लोगों ने करीब 15.479 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा था। यह भूमि राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित आवासीय योजना के लिए आरक्षित की गई थी।
बोर्ड के अनुसार, कब्जे में शामिल भूमि का आकार 5,000 वर्गफुट से लेकर 10,000 वर्गफुट से अधिक तक था। हाउसिंग बोर्ड का कहना है कि इस भूमि के आवंटन की प्रक्रिया वर्ष 2020 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान ही शुरू हो गई थी।
2021 में केवल 3 हेक्टेयर पर था अतिक्रमण
बोर्ड की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2021 के राजस्व अभिलेखों में करीब 3 हेक्टेयर क्षेत्र में केवल कच्चे मकान और बाड़ी स्वरूप अतिक्रमण दर्ज था। हालांकि, वर्ष 2023 के बाद भूमि आवंटन की जानकारी सामने आने के पश्चात बड़े पैमाने पर पक्के निर्माण हुए और अतिक्रमण बढ़कर लगभग 15 हेक्टेयर तक पहुंच गया।
हाउसिंग बोर्ड ने जारी की पूरी टाइमलाइन
बोर्ड ने वर्ष 2020 से 2023 तक की प्रशासनिक प्रक्रिया की विस्तृत टाइमलाइन भी जारी की है—
- 1 सितंबर 2020: ग्राम नकटी में आवासीय योजना के लिए भूमि आवंटन का प्रस्ताव कलेक्टर को भेजा गया।
- 4 जनवरी 2021: सार्वजनिक विज्ञापन जारी किया गया, लेकिन कोई आपत्ति प्राप्त नहीं हुई।
- 26 जून 2021: राजस्व प्रतिवेदन में लगभग 3 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिक्रमण का उल्लेख किया गया।
- 25 फरवरी 2022: भूमि आवंटन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
- वर्ष 2023: बोर्ड के अनुसार, भूमि आवंटन की जानकारी के बाद अतिक्रमण तेजी से बढ़कर करीब 15 हेक्टेयर तक पहुंच गया।
- जून 2025: सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ग्रामीणों के मकानों को छोड़ शेष भूमि पर विधायक आवास बनाने का सुझाव दिया।
कांग्रेस की जांच समिति आज करेगी कलेक्टर से मुलाकात
इस मामले को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने भी सक्रियता दिखाई है। पूर्व मंत्री धनेंद्र साहू की अध्यक्षता में गठित 12 सदस्यीय जांच समिति शुक्रवार सुबह 11 बजे प्रभावित परिवारों के साथ कलेक्टर से मुलाकात करेगी। समिति पुनर्वास, उचित मुआवजा और प्रभावित लोगों पर दर्ज प्रकरण वापस लेने की मांग करेगी।
मलबे के बीच गुजार रहे हैं दिन
बुलडोजर कार्रवाई के बाद कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। बारिश के बीच लोग अपने टूटे हुए घरों के मलबे के पास ही तंबू लगाकर रह रहे हैं।
प्रभावित महिला फुलेश्वरी यादव ने बताया कि उनके पति हेमलाल यादव के नाम की जगह सूची में गलती से प्रेमलाल दर्ज हो गया, जिसके कारण उन्हें ईडब्ल्यूएस आवास का लाभ नहीं मिल सका। उनका घर भी कार्रवाई में ढह गया। उन्होंने कहा कि अब बच्चों के साथ रहने के लिए कोई सुरक्षित स्थान नहीं बचा है, इसलिए मजबूरी में मलबे के बीच ही तंबू लगाकर रहना पड़ रहा है।
विवाद जारी
एक ओर हाउसिंग बोर्ड दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई को वैध और नियमानुसार बता रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित परिवार पुनर्वास और न्याय की मांग पर अड़े हुए हैं। अब सभी की नजर प्रशासन और कांग्रेस की जांच समिति की बैठक के बाद होने वाले फैसलों पर टिकी है।
