नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ की नई राजधानी नवा रायपुर अटल नगर को पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास की दिशा में एक नई पहचान देने की तैयारी शुरू हो गई है। नवा रायपुर विकास प्राधिकरण (एनआरडीए) ने शहर को प्रदेश की पहली ‘पीपल सिटी’ के रूप में विकसित करने का महत्वाकांक्षी अभियान शुरू किया है। इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 1.25 लाख विकसित पौधों का रोपण किया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि शहर की जलवायु को बेहतर बनाना, वायु प्रदूषण कम करना और पर्यावरण संरक्षण को नई मजबूती देना है।
योजना के अनुसार हर वर्ष लगभग 25 हजार विकसित पौधे लगाए जाएंगे। इन पौधों की ऊंचाई करीब 10 फीट होगी, जिससे उनके जीवित रहने की संभावना अधिक रहेगी और कम समय में वे बड़े वृक्ष का रूप ले सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पौधे लगाने से हरियाली तेजी से विकसित होती है और रखरखाव की चुनौतियां भी कम हो जाती हैं।
पीपल वन बनेगा अभियान का सबसे बड़ा आकर्षण
इस हरित अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सेक्टर-16 में 24 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाला ‘पीपल वन’ होगा। यहां पहले से मौजूद आम्रकुंज के साथ बड़ी संख्या में पीपल के पौधे लगाए जाएंगे, जिससे यह क्षेत्र एक विशाल हरित वन के रूप में विकसित होगा। इसके अलावा सेक्टर-39 (मुढ़पार) में 16 एकड़ क्षेत्र में दूसरा ब्लॉक प्लांटेशन तैयार किया जाएगा, जबकि सेक्टर-24 स्थित बायोडायवर्सिटी पार्क के पीछे 75 एकड़ भूमि पर मिश्रित प्रजातियों का पौधारोपण किया जाएगा।
108 जलाशयों और 33 किलोमीटर जलधाराओं के किनारे भी हरियाली
एनआरडीए की योजना केवल पार्कों और सड़कों तक सीमित नहीं है। शहर के 108 जलाशयों और करीब 33 किलोमीटर लंबी जलधाराओं के किनारे भी बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा। इससे जल स्रोतों का संरक्षण होगा, मिट्टी का कटाव कम होगा और शहर के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशयों के आसपास हरियाली बढ़ने से भूजल संरक्षण और जैव विविधता को भी लाभ मिलेगा।
आधुनिक नर्सरी से तैयार होंगे विकसित पौधे
इस अभियान के लिए साउथ सेंट्रल पार्क में चार एकड़ क्षेत्र में आधुनिक नर्सरी विकसित की गई है। यहां विशेष रूप से विकसित पीपल के पौधे तैयार किए जा रहे हैं। आने वाले पांच वर्षों तक इसी नर्सरी से पौधों की आपूर्ति की जाएगी। भविष्य में यहां नीम, कनेर, बोगनवेलिया और विभिन्न मौसमी फूलों के पौधे भी तैयार किए जाएंगे, ताकि शहर के अलग-अलग हिस्सों में विविध प्रजातियों का रोपण किया जा सके।
पीपल के साथ नीम और अन्य छायादार प्रजातियों पर भी जोर
हालांकि इस अभियान का मुख्य केंद्र पीपल का वृक्ष होगा, लेकिन इसके साथ नीम सहित अन्य छायादार और पर्यावरण के लिए उपयोगी प्रजातियों का भी बड़े पैमाने पर रोपण किया जाएगा। इन पौधों को शहर की मुख्य सड़कों, ग्रीन बेल्ट, पार्कों, सरकारी खाली जमीनों और सार्वजनिक स्थानों पर लगाया जाएगा, ताकि पूरे शहर में संतुलित हरित क्षेत्र विकसित हो सके।
बड़े पौधों से जल्दी मिलेगा हरियाली का लाभ
एनआरडीए ने इस अभियान में छोटे पौधों की बजाय विकसित और बड़े पौधों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। लगभग 10 फीट ऊंचे पौधे कम समय में वृक्ष का रूप ले लेते हैं और उनके सूखने की संभावना भी काफी कम होती है। सड़क किनारे लगाए जाने वाले घने वृक्ष धूल और वायु प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ गर्मी के प्रभाव को भी घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
धार्मिक, सांस्कृतिक और औषधीय दृष्टि से भी खास है पीपल
पीपल का वृक्ष भारतीय संस्कृति, धर्म और आयुर्वेद में विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं में इसे पवित्र वृक्ष माना जाता है, वहीं इसकी पत्तियां, छाल, जड़ और फल औषधीय गुणों से भरपूर माने जाते हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार पीपल अधिक मात्रा में ऑक्सीजन प्रदान करने वाले महत्वपूर्ण वृक्षों में गिना जाता है और जैव विविधता को भी बढ़ावा देता है।
शहरवासियों को मिलेंगे कई बड़े लाभ
इस महत्वाकांक्षी हरित अभियान के पूरा होने के बाद नवा रायपुर में हरियाली का दायरा काफी बढ़ जाएगा। वायु प्रदूषण, धूल और धुएं में कमी आएगी, जिससे लोगों को स्वच्छ और शुद्ध हवा मिलेगी। गर्मियों में तापमान नियंत्रित रखने में भी इन वृक्षों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। साथ ही जलाशयों का संरक्षण, जैव विविधता का विकास और पर्यावरण संतुलन को मजबूती मिलेगी। आने वाले वर्षों में नवा रायपुर एक स्वच्छ, हरित और पर्यावरण अनुकूल शहर के रूप में नई पहचान हासिल कर सकता है।पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एनआरडीए की यह पहल न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि देश के अन्य शहरों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल साबित हो सकती है।
