रायपुर। नगर निगम रायपुर ने खर्च और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब जोन आयुक्त अपने स्तर पर केवल 50 हजार रुपये तक के भुगतान को मंजूरी दे सकेंगे। इससे अधिक राशि के सभी भुगतान अब सीधे निगम मुख्यालय से किए जाएंगे। इससे पहले जोन आयुक्तों को 4 लाख रुपये तक के भुगतान की वित्तीय स्वीकृति का अधिकार प्राप्त था।
निगम प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय ऑडिट आपत्तियों को कम करने, भुगतान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने और वित्तीय अनियमितताओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से लिया गया है। पिछले कुछ समय से जोन कार्यालयों से होने वाले भुगतानों को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं, जिसके बाद वित्तीय अधिकारों में कटौती का निर्णय लागू किया गया।
नगर निगम में वार्डों की सफाई का कार्य विभिन्न ठेका एजेंसियों के माध्यम से कराया जा रहा है। वहीं, प्लेसमेंट कंपनियों के जरिए कार्यरत कर्मचारियों के भुगतान से जुड़ी कई फाइलें लंबे समय से ऑडिट प्रक्रिया में लंबित हैं। बताया जा रहा है कि इन फाइलों में सबसे अधिक तकनीकी और दस्तावेजी खामियां पाई गई हैं। पिछले 15 दिनों में लगभग 60 भुगतान फाइलें जांच के लिए निगम मुख्यालय पहुंचीं, जिनमें से केवल 7 फाइलों को ही स्वीकृति मिल सकी। इससे ठेकेदारों और कर्मचारियों के भुगतान में देरी हो रही है।
इस बीच नगर निगम सिविल ठेकेदार संघ ने भी ऑडिट प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। संघ के अध्यक्ष दुर्गेश सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि ऑडिटर 10 से 15 दिनों तक फाइलों की जांच नहीं कर रहे हैं और ठेकेदारों को उनकी फाइलों की स्थिति की जानकारी भी नहीं दी जा रही है। उनका कहना है कि इससे विकास कार्यों के साथ-साथ भुगतान व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वित्तीय अधिकारों में बदलाव का निर्णय पहले ही लिया जा चुका था और इसे पूरी पारदर्शिता तथा वित्तीय विवेक को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में कार्यरत ऑडिटर्स को निगम की वित्तीय फाइलों के ऑडिट का पर्याप्त अनुभव नहीं है, जिसके कारण जांच प्रक्रिया में समय लग रहा है। स्थिति में सुधार के लिए निगम जल्द ही ऑडिटर्स की संख्या बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
इस नई व्यवस्था से निगम को उम्मीद है कि भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी, ऑडिट संबंधी आपत्तियों में कमी आएगी और वित्तीय प्रबंधन पहले की तुलना में अधिक प्रभावी बन सकेगा।
