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मुख्यमंत्री मोहन यादव की संपत्ति पर सियासत तेज, हलफनामे में 42 करोड़ रुपये की संपत्ति का था खुलासा

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav की संपत्तियों को लेकर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार और उनसे जुड़े लोगों द्वारा कई स्थानों पर जमीनें खरीदी गईं, जिन क्षेत्रों में बाद में हाईवे, कॉरिडोर और अन्य विकास परियोजनाओं की घोषणाएं हुईं।

हालांकि, मुख्यमंत्री की ओर से वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल किए गए शपथ पत्र में उनकी चल और अचल संपत्तियों का विस्तृत विवरण पहले ही सार्वजनिक किया जा चुका था। चुनावी हलफनामे के अनुसार, डॉ. मोहन यादव ने अपनी कुल संपत्ति लगभग 42 करोड़ रुपये घोषित की थी। उसी समय उनके ऊपर करीब 8.54 करोड़ रुपये की देनदारियां भी दर्ज थीं।

  • करोड़ों की कृषि भूमि और संपत्तियां

हलफनामे के मुताबिक, मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम पर उज्जैन सहित विभिन्न स्थानों पर कृषि योग्य भूमि मौजूद है। दस्तावेजों के अनुसार, सीमा यादव के नाम पर उज्जैन में पांच अलग-अलग स्थानों पर कृषि भूमि दर्ज थी, जिनकी अनुमानित कीमत वर्ष 2023 में करीब 7.97 करोड़ रुपये बताई गई थी।

इसके अलावा, परिवार के नाम पर विभिन्न भूखंड, मकान और अन्य अचल संपत्तियां भी दर्ज हैं, जिनका विवरण चुनाव आयोग को सौंपे गए दस्तावेजों में शामिल था।

  • सोना, वाहन और अन्य संपत्तियां

मुख्यमंत्री के चुनावी हलफनामे में उनकी चल संपत्तियों का भी उल्लेख किया गया था। दस्तावेजों के अनुसार, उनके पास लगभग 140 ग्राम सोना, वाहन तथा अन्य मूल्यवान संपत्तियां दर्ज थीं। इसके साथ ही कुछ लाइसेंसी हथियारों का विवरण भी शपथ पत्र में शामिल किया गया था।

  • विपक्ष ने उठाए सवाल

हाल के दिनों में सामने आई रिपोर्टों के बाद विपक्ष ने मुख्यमंत्री और उनके परिवार की भूमि खरीद को लेकर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि जिन इलाकों में भविष्य की विकास परियोजनाओं की संभावनाएं थीं, वहां जमीनों की खरीद की गई।

वहीं, मुख्यमंत्री पक्ष का कहना है कि उनकी संपत्तियों का पूरा विवरण पहले से ही सार्वजनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध है और सभी जानकारी चुनावी हलफनामे में घोषित की जा चुकी है।

  • राजनीतिक बहस जारी

मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष जहां इस मुद्दे पर जवाब मांग रहा है, वहीं सत्तारूढ़ दल इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा बता रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

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