नई दिल्ली। चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत ओडिशा, मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी गई है। इन चार राज्यों में 22 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम प्रारंभिक सूची से हटाए गए हैं। आयोग का कहना है कि जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हैं, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा और आपत्ति दर्ज कराकर अपना नाम दोबारा जुड़वाने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
चुनाव आयोग के अनुसार, SIR अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है। आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया के तहत मृत, स्थानांतरित या अन्य कारणों से अयोग्य हो चुके मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, ताकि चुनावी सूची की शुद्धता सुनिश्चित की जा सके।
अब तक कितने नाम हटाए गए?
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, विशेष पुनरीक्षण अभियान के दौरान बिहार में 65 लाख, पश्चिम बंगाल में 37 लाख और उत्तर प्रदेश में 25 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। कुल मिलाकर 13 राज्यों में अब तक लगभग 6 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं।
इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जारी है अभियान
वर्तमान में चुनाव आयोग 16 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR अभियान चला रहा है। इनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड शामिल हैं। इसके अलावा दिल्ली, चंडीगढ़, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव में भी मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण किया जा रहा है।
SIR अभियान क्यों चलाया जा रहा है?
चुनाव आयोग का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची की वैधता और शुद्धता सुनिश्चित करना है, ताकि केवल पात्र मतदाताओं के नाम ही सूची में बने रहें। आयोग का यह भी कहना है कि जिन योग्य मतदाताओं के नाम किसी कारणवश ड्राफ्ट सूची से हट गए हैं, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोबारा शामिल होने का पूरा अवसर दिया जाएगा।
विपक्ष ने उठाए सवाल
SIR अभियान को लेकर विपक्षी दलों ने अपनी आपत्तियां भी दर्ज कराई हैं। इंडिया गठबंधन से जुड़े 23 विपक्षी दलों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि अभियान की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं है और कई स्थानों पर मतदाताओं के नाम मनमाने तरीके से हटाए जा रहे हैं। विपक्ष ने इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।
फिलहाल, चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच SIR अभियान को लेकर बहस जारी है। अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दावा-आपत्ति प्रक्रिया के बाद कितने नाम दोबारा सूची में शामिल किए जाते हैं।
