मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के भीतर जारी सियासी उथल-पुथल के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बागी सांसद संजय देशमुख पर जोरदार हमला बोला है। राउत ने दावा किया कि पार्टी के सांसदों को तोड़ने के लिए करोड़ों रुपये का लालच दिया गया और यह पूरी राजनीतिक साजिश सत्ता के दम पर रची जा रही है।
संजय राउत ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि कुछ सांसदों को पार्टी छोड़ने के लिए 50 करोड़ रुपये तक का प्रस्ताव दिया गया, जबकि कथित तौर पर अग्रिम राशि भी दी गई। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनादेश की खरीद-फरोख्त की यह कोशिश बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंच रहा है। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है।
राउत ने कहा कि जो नेता आज सत्ता और पैसों के लालच में पार्टी छोड़ रहे हैं, उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि जनता ने उन्हें शिवसेना (यूबीटी) और उद्धव ठाकरे के नाम पर चुनकर संसद भेजा है। उन्होंने कहा कि यदि इन नेताओं में नैतिकता बची है तो उन्हें सांसद पद से इस्तीफा देकर दोबारा जनता के बीच जाना चाहिए।
इस दौरान राउत ने भावुक अंदाज में कहा, “ठाकरे राख से फिर उठेंगे। ठाकरे परिवार और शिवसैनिकों ने इससे भी बड़े राजनीतिक संकट देखे हैं। हमारी विचारधारा को पैसों के बल पर खत्म नहीं किया जा सकता।” उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी कार्यकर्ता एकजुट होकर संगठन को फिर से मजबूत करेंगे और जनता भी ऐसे नेताओं को उचित जवाब देगी जो व्यक्तिगत लाभ के लिए दल बदल रहे हैं।
दरअसल, हाल के दिनों में शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसदों के पार्टी से अलग होने की अटकलें तेज हुई हैं। इसी बीच संजय देशमुख सहित कुछ सांसदों के शिंदे गुट के संपर्क में होने की चर्चाओं ने महाराष्ट्र की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। पार्टी नेतृत्व ने इसे गंभीरता से लेते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई के संकेत भी दिए हैं।
राउत ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव और आर्थिक प्रलोभन के जरिए विपक्ष को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल शिवसेना (यूबीटी) का मामला नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और विपक्ष की भूमिका पर भी बड़ा सवाल है।
हालांकि, जिन सांसदों के नाम सामने आए हैं, उनकी ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि यदि बड़ी संख्या में सांसद पाला बदलते हैं तो इसका असर राज्य की राजनीति के साथ-साथ संसद में पार्टी की स्थिति पर भी पड़ सकता है।
