मुंबई। बुधवार का कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद उतार-चढ़ाव भरा साबित हुआ। दिनभर दबाव में कारोबार करने के बाद आखिरी कारोबारी घंटे में बाजार में अचानक जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली, जिससे बीएसई सेंसेक्स करीब 1,900 अंक तक टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी भी भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। इस तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी और कुछ ही घंटों में बाजार पूंजीकरण (Market Capitalization) में लाखों करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस बड़ी गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को लेकर दिया गया सख्त बयान रहा। ट्रंप ने कहा कि अब ईरान के साथ किसी भी तरह की बातचीत की संभावना नहीं है और अमेरिका अपनी रणनीति पर आगे बढ़ेगा। इस बयान के बाद मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने की आशंका तेज हो गई, जिसका असर दुनिया भर के वित्तीय बाजारों पर दिखाई दिया।
वैश्विक तनाव का भारतीय बाजार पर असर
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक निवेशकों की धारणा पर पड़ा। निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया। इसका असर भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली के रूप में भी देखने को मिला।
बाजार के आखिरी घंटे में आई तेज बिकवाली ने लगभग सभी सेक्टर्स को अपनी चपेट में ले लिया। आईटी, बैंकिंग, ऑटो, मेटल, रियल्टी और फाइनेंशियल शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। कई दिग्गज कंपनियों के शेयर 3 से 6 प्रतिशत तक फिसल गए।
निवेशकों में बढ़ी घबराहट
विश्लेषकों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की स्थिति में विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालना शुरू कर देते हैं। यही वजह रही कि भारतीय बाजार में भी अचानक बिकवाली का दबाव बढ़ गया। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है, तो बाजार में फिर से स्थिरता लौट सकती है।
आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर
अब निवेशकों की निगाहें अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों के निवेश रुख और वैश्विक बाजारों के संकेतों पर रहेंगी। यदि अंतरराष्ट्रीय हालात और बिगड़ते हैं, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
फिलहाल, बुधवार की यह गिरावट निवेशकों के लिए एक बड़ा झटका साबित हुई है और इसने यह साफ कर दिया है कि वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम का असर भारतीय शेयर बाजार पर कितनी तेजी से पड़ सकता है।
