नई दिल्ली/नागपुर: NEET पुनर्परीक्षा से ठीक एक दिन पहले एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। महाराष्ट्र के नागपुर के एक छात्र के एडमिट कार्ड में परीक्षा केंद्र अबू धाबी (यूएई) दर्ज होने से छात्र और उसके परिवार की परेशानी बढ़ गई है। छात्र के पास न तो पासपोर्ट है और न ही परिवार के पास विदेश भेजने के लिए आर्थिक संसाधन हैं। इस घटना को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी बहस तेज हो गई है।
- परीक्षा से पहले बढ़ी छात्र की चिंता
जानकारी के अनुसार, छात्र पिछले एक महीने से NEET पुनर्परीक्षा की तैयारी कर रहा था। परीक्षा से एक दिन पहले जब उसने अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड किया, तो उसमें परीक्षा केंद्र के रूप में अबू धाबी का नाम देखकर वह हैरान रह गया। परिवार का कहना है कि इतनी कम अवधि में विदेश यात्रा की व्यवस्था करना संभव नहीं है। इस अप्रत्याशित स्थिति के कारण छात्र मानसिक तनाव में आ गया और पूरी रात परेशान रहा।
- राहुल गांधी ने उठाए सवाल
लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने इस मामले को गंभीर बताते हुए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि एक ऐसे छात्र को, जिसके पास पासपोर्ट तक नहीं है, विदेश में परीक्षा केंद्र आवंटित होना व्यवस्था की बड़ी खामी को दर्शाता है।राहुल गांधी ने कहा कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी की जिम्मेदारी है कि किसी भी छात्र को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में परेशानी न हो। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाएं छात्रों और अभिभावकों की मानसिक परीक्षा ले रही हैं तथा शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रही हैं।
- प्रियंका चतुर्वेदी ने भी जताई चिंता
Priyanka Chaturvedi ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पहले से ही पुनर्परीक्षा का दबाव झेल रहे छात्रों के लिए ऐसी गलती मानसिक तनाव को और बढ़ाने वाली है। उन्होंने NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मामले की तत्काल जांच की मांग की।
- NTA पर बढ़ा दबाव
घटना सामने आने के बाद NTA की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं। छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में इस प्रकार की त्रुटियां उम्मीदवारों के भविष्य को प्रभावित कर सकती हैं। अब सभी की निगाहें NTA की प्रतिक्रिया और इस छात्र के लिए किए जाने वाले समाधान पर टिकी हैं।
- छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा केंद्र आवंटन में तकनीकी या प्रशासनिक त्रुटियों से छात्रों पर गंभीर मानसिक प्रभाव पड़ता है। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और पारदर्शिता बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो।
