कोलकाता:पश्चिम बंगाल विधानसभा में हाल ही में पारित हुए ‘पश्चिम बंगाल जन सुरक्षा और असामाजिक गतिविधि नियंत्रण विधेयक, 2026’ को लेकर राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य के मंत्री दिलीप घोष ने इस नए कानून का जोरदार बचाव किया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि राज्य की जनता राजनीतिक संरक्षण प्राप्त उपद्रवियों और गुंडागर्दी से पूरी तरह तंग आ चुकी थी, जिसके कारण सरकार को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।
“डरें नहीं, सामने आएं” — दिलीप घोष
समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बात करते हुए दिलीप घोष ने कहा:
“पश्चिम बंगाल के लोग सालों से जारी इस गुंडागर्दी और हिंसा को देख-देखकर थक चुके हैं, खासकर इसलिए क्योंकि इनमें से अधिकांश बदमाशों को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ था। इस खतरे को रोकने के लिए हमें नया कानून लाना पड़ा, और इसे बेहद सख्ती से लागू किया जाएगा।”
उन्होंने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि जो लोग अभी भी डर के मारे चुप हैं, उन्हें आगे आना चाहिए और पुलिस में एफआईआर दर्ज करानी चाहिए। अब कानून अपना काम सख्ती से करेगा।
भारी बहुमत से पास हुआ विधेयक
यह विधेयक जून 2026 में पश्चिम बंगाल विधानसभा में पेश किया गया था, जहां इसे 176 बनाम 41 वोटों के भारी बहुमत से पारित कर दिया गया।विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) और माकपा (CPI-M) पर राज्य में राजनीतिक हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने याद दिलाया कि वामपंथी शासन के दौरान 2001 में लोकतांत्रिक तरीके से विपक्ष को रोकने के लिए कैसे ‘हरमाद संस्कृति’ (गोयंदा राज) की शुरुआत की गई थी।
नए कानून की मुख्य बातें और खास प्रावधान:
यह कानून राज्य में सार्वजनिक सुरक्षा बढ़ाने और संगठित अपराधों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से लाया गया है:
- सख्त कार्रवाई जनता में डर या आतंक का माहौल बनाने वाले, सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने वाले, सरकारी या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले और जबरन व्यापार रोकने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
- अवैध खनन पर रोक गैर-कानूनी खनन, बालू का अवैध उठाव , और वन्यजीव या वन संसाधनों की तस्करी को भी अब असामाजिक गतिविधियों के दायरे में लाया गया है।
- निवारक निरोध सरकार या अधिकृत अधिकारियों (जैसे जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस कमिश्नर) के पास यह शक्ति होगी कि यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बनता है, तो उसे हिरासत में लिया जा सकता है।
- गैर-जमानती अपराध इस अधिनियम के तहत किए गए सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानतीहोंगे।
- संपत्ति की कुर्की यदि कोई आरोपी गिरफ्तारी या जांच से बचने के लिए भागता है, तो अदालत के माध्यम से उसकी संपत्ति कुर्क करने और विशेष कार्रवाई करने का भी प्रावधान है।
सरकार ने आश्वस्त किया है कि इस कानून का कोई दुरुपयोग नहीं होगा और इसका इस्तेमाल केवल जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा।
