चंडीगढ़। पंजाब में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी से जुड़ी फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक और नकल के मामले ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर भगवंत मान सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखने में विफल रही है और मामले की गंभीरता को कम करके दिखाने की कोशिश कर रही है।
विपक्षी दलों का दावा है कि आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में अब तक पेपर लीक के कई मामले सामने आ चुके हैं। उनका कहना है कि सरकार इन्हें केवल “नकल” की घटनाएं बताकर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रही है, जबकि इससे लाखों युवाओं के भविष्य और भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।
शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग
पेपर लीक विवाद को लेकर कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा ने राज्य के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं की जवाबदेही सरकार को स्वीकार करनी चाहिए।
CJP की चुप्पी पर राजनीतिक सवाल
इस विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की चुप्पी भी राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया है कि अन्य राज्यों में पेपर लीक के मामलों पर मुखर रहने वाले CJP के नेता पंजाब के मामले में कोई बड़ा आंदोलन या बयान क्यों नहीं दे रहे हैं। भाजपा नेताओं ने भी इस मुद्दे पर CJP के रुख को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
सरकार का पक्ष
वहीं, भगवंत मान सरकार का कहना है कि परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
राजनीतिक घमासान जारी
पेपर लीक के मुद्दे ने पंजाब की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्ष इस मामले को युवाओं के भविष्य और सरकारी भर्ती की विश्वसनीयता से जोड़कर सरकार पर लगातार हमलावर है, जबकि सरकार जांच और कार्रवाई का भरोसा देकर विपक्ष के आरोपों को खारिज कर रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और अधिक गर्माने के संकेत दे रहा है।
